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नई ताजगी

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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धूप गर्मी की अब तो पसरने लगी,
खेत की सारी फसलें भी पकने लगीं
मस्त ख़ुशबू अमलतास गुड़हल की अब,
फ़िज़ाओं में रह-रह बिखरने लगी।

अपने साज़ों हुनर से धरा भी यहाँ,
नित नए चित्र में रंग भरने लगी
हर तरफ़ हर दिशा में खुशी ही खुशी,
सारी अमराइयाँ भी महकने लगी।

अब पहाड़ों से झरने उतरने लगे,
तरु शिखा सुर्ख होकर निखरने लगी
हर तरफ़ फैली ईश्वर की सौग़ात है,
झील में मछलियाँ भी मचलने लगीं।

नित गुज़रता समय ये चला जा रहा,
याद बीते समय की लुभाने लगी।
जीना है ज़िंदगी आज जी भर जियो,
अब नई ताज़गी मुस्कुराने लगी॥