प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)…
“भैया तुम कितनी देर में आओगे ?”
“आता हूँ, जरा बिजी हूँ।”
“भैया बहुत देर हो गई, अब तो आ जाओ।”
“ट्रिन ट्रिन——“
“——–“
“ट्रिन ट्रिन——–“
“———-“
“अरे तुम क्यों परेशान हो रही हो ? तुम्हारा मिनिस्टर भाई विधवा आश्रम की महिलाओं से राखी बँधवाने में व्यस्त होगा न ?” पति ने भाई को राखी बाँधने के लिए व्याकुल हो रही अपनी पत्नी से कहा, जो बार-बार भाई को फोन कर रही थी।
“दरअसल बात यह है, कि हम दोनों साल भर के अंतर वाले बहन-भाई हैं, साथ ही खेल-कूदकर बड़े हुए हैं। चूँकि, भाई शुरू में छात्र राजनीति में रहा। कालेज का प्रेसीडेंट रहा, फिर छात्र संगठनों में शामिल होकर पार्टी पोलिटिक्स में चला गया।—और फिर विधायक बनकर मिनिस्टर बन गया, पर भैया ने मुझे वचन दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए, कैसे भी हालात हों, वह मुझसे राखी बँधवाने मेरे पास पहुँच ही जाएँगे। इसीलिए मैं उनका इंतजार कर रही हूँ।”
“हाँ, तुम्हारा कहना ठीक है पर आज तुम्हारे मिनिस्टर भाई के नगर में अनेक कार्यक्रम हैं। पता नहीं, उन्हें किन-किन से राखी बँधवानी है, तो ऐसे में उन्हें यह याद होगा ही नहीं कि उन्हें अपनी सगी छोटी बहन से भी राखी बँधवानी है।” पति ने कहा।
“नहीं ऐसा नहीं हो सकता, मेरा भाई जरुर आएगा।” बहन ने पूरे भरोसे के साथ कहा।
“अच्छा,तुम राखी की थाली सजाकर तैयार कर लो। मैं पता करके और मंत्री जी को लेकर आता हूँ, आखिर शाम हो गई तुम कब तक भूखी रहकर भाई को राखी बाँधने का रास्ता देखोगी ?”
तभी टी.वी. पर न्यूज आती है-“हमारे नगर में पधारे समाज कल्याण मंत्री दिनभर विधवा आश्रम, अनाथ आश्रम व लाड़ली बहनों से राखी बँधवाने के बाद स्थानीय कार्यक्रमों से निवृत्त होने के बाद वापस राजधानी लौट गए हैं।”
यह न्यूज सुनकर सजी हुई राखी की थाली विलाप करती नजर आई, और जलाया गया दीप एक बार फिर बुझ गया था।
परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है