व्याख्यानमाला…
भोपाल (मप्र)।
मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति (हिन्दी भवन न्यास, भोपाल) द्वारा हिन्दी भवन के सारस्वत आयोजनों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ३१वीं पावस व्याख्यानमाला-२०२६ का आयोजन रविवार को हिन्दी भवन (भोपाल) में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों ने साहित्य, सामाजिक समरसता, अध्यात्म व समकालीन सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया।
इस गरिमामयी कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने की। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति देवदत्त माधव धर्माधिकारी (पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय) द्वारा पुस्तक ‘न्याय का अनकहा सफ़र’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर पत्रिका ‘अक्षरा’ का कैलाशचन्द्र पंत विशेषांक भी लोकार्पित हुआ। नव श्रृंगारित ग्रंथालय का लोकार्पण एवं मुख्य सभागार का नामकरण भी किया गया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एवं प्रस्तावना साहित्य अकादमी मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे ने प्रस्तुत की। उद्घाटन सत्र में प्रो. पवन विजय (प्राध्यापक, इन्द्रप्रस्थ विवि, दिल्ली) ने आध्यात्मिक लेखन के साहित्यिक अवदान पर विचार व्यक्त किए। आभार रघुनंदन शर्मा ने माना। संचालन डॉ. संजय सक्सेना ने किया।
समापन सत्र में ‘सामाजिक समरसता की प्रासंगिकता’ विषय पर विशेष विमर्श का सत्र संत रविदास जी की ६५०वीं जयंती वर्ष के विशेष संदर्भ में केंद्रित रहा। अध्यक्षता साहित्यकार डॉ. देवेंद्र दीपक ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. गुरुप्रकाश पासवान (पटना) ने सामाजिक समरसता, समानता और संत रविदास की विचार-दृष्टि के समकालीन महत्व पर विचार व्यक्त किए।
संचालन श्रीमती अनीता सक्सेना ने किया। आभार डॉ. दवे ने व्यक्त किया।