एक वीर का आखरी खत

विजय कुमारमणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** लिख रहा हूँ,खत तुम्हें माँकलम न मिली तो खून से,अचंम्भित है दुश्मन,मेरे प्रचण्ड प्रहार से,लाशों के ढेर और खाली हथियार से। लगी है प्यास तो रक्त पी रहा हूँदुश्मन के आगे दीवार बन गया हूँ,गोली तो हमें भी लगी,पर डरा नहीं हूँसाँस रुक रही है,पर सिर झुकाया नही है। एक इंच भी … Read more

भारतीयता की संजीवनी बूंटी थे स्वामी विवेकानन्द

ललित गर्गदिल्ली ******************************************************************* स्वामी विवेकानन्द पुण्यतिथि-४ जुलाई विशेष महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका मानवहितकारी चिन्तन एवं कर्म कालजयी होता है और युगों-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। स्वामी विवेकानंद हमारे ऐसे ही एक प्रकाश स्तंभ हैं,वे भारतीय संस्कृति एवं भारतीयता के प्रखर प्रवक्ता,युगीन समस्याओं के समाधायक,अध्यात्म और विज्ञान … Read more

कितनी बार तू मुँह की खाएगा…

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* भारत और चीन के रिश्ते स्पर्धा विशेष…… ऐ चीन कितनी बार,तू मुँह की खाएगा…हर बार दिखा गद्दारी तू,अब कहां खुद्दार बन पाएगाl सिखा-सिखा दया और,धर्म का पाठ तुझे…हम आज भी न थक पाए हैं,पर तू रहा निरा गंवार का गंवारl मशीनों की ताकत पर,भरता होगा तू दम…नहीं हम बुजदिल और,कायर … Read more

युद्ध बड़ा हरजाई

अख्तर अली शाह `अनन्त`नीमच (मध्यप्रदेश) **************************************************************** भारत और चीन के रिश्ते स्पर्धा विशेष…… दिल के आँगन में लालच ने,ही दीवार उठाई है।अगर विश्व परिवार हमारा,चीन हमारा भाई हैll अगर कोई सत्तर सालों के,रिश्तों को अपने तौले,सच्चाई आएगी सम्मुखबिना हमारे कुछ बोलेlचीन रहा विस्तारवाद का,पोषक सब ये जान रहे,बेईमान बला का उसको,सभी पड़ोसी मान रहे।बिना बात … Read more

भारत और चीन के कड़वाहट भरे रिश्ते

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* भारत और चीन के रिश्ते स्पर्धा विशेष…… सर्वविदित है कि भारत और चीन के रिश्तों में हमेशा कड़वाहट रही है। यह किसी से छुपी नहीं है,बल्कि जगजाहिर है।१९६२ के दशक में चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया था। फलस्वरूप भारत की जान-माल की अत्यंत हानि हुई थी,किन्तु … Read more

ज्ञान मिले तो जग मिले

कृष्ण कुमार कश्यपगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** जग में शिक्षा की सदा,होती जय-जयकार।कर्म धर्म धन है यही,है जीवन का सार॥ यह धन जग में है बड़ा,दूजा क्या अनमोल।ज्ञान कभी बिकता नहीं,आँखें अब तो खोल॥ गीता की वाणी यहाँ,इसमें चारों धाम।ज्ञान मिले मिल जाय सब,सोच-समझ कर काम॥ लूट सको तो लूट लो,जहाँ ज्ञान की खान।ज्ञानवान बनना तुम्हें,तो कर … Read more

तूने अपने विनाश को पुकारा है

सोनी गिरीआजमगढ़(उत्तरप्रदेश)******************************************** सुन रे मेरे दुश्मन,हम भारत माँ के बच्चे हैं,हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख-इसाई हम सब हैं भाई-भाई। मीठी-मीठी बात करने वाले पीठ पीछे घात करने वाले,भारत से हाथ मिला कर,धोखा करने वाले।अरे गद्दार चीन-पाकिस्तान तू अति घातक हत्यारा है।भारत माँ के हर बच्चे ने अब तुझे ललकारा है,हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख…॥ चक्षु दिखाने की जुर्रत भी की तो निकाल तेरे … Read more

बरखा रानी आई है

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़ ************************************************** गड़-गड़ गरजे आसमान से,घोर घटा भी छाई है।छम-छम करती हँसती-गाती,बरखा रानी आई हैllझूम उठी है धरती सारी,पौधे सब मुस्काये हैं।चहक उठी है चिड़िया रानी,भौंरा गाना गाये हैंllठूँठ पड़े पेड़ों में भी तो,हरियाली अब छाई है।छम-छम करती हँसती-गाती,बरखा रानी आई हैll लगे छलकने ताल-तलैया,पोखर सब भर आये हैं।कल-कल करती नदियाँ बहती,झरने … Read more

बिल्ली के बच्चे

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’कोटा(राजस्थान)***************************************************************** घूम रहे घर-आँगन में बिल्ली के बच्चे,माँ सोई है और पास ये उसके फिरतेउछल-कूद कर इक-दूजे पर रहते गिरते,उड़ा रहे हैं चिंता के सारे परखच्चे।बच्चे हैं ये अभी समझ के थोड़े कच्चे,पर चिन्ता से मन इनके हैं कभी न घिरतेनिडर बने बाहर गलियों में रहे विचरते,कुत्तों से ये कभी कभी खा जाते … Read more

प्रेरणार्थक बने

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’इन्दौर(मध्यप्रदेश)*************************************************************** सबके पथ प्रदर्शक बनें,जीवन ना निरर्थक बने। आँखों से बहे ना अश्रु धारा,कर्म हमारा सार्थक बने। अनर्गल करे ना वार्तालाप,सारा जहां समर्थक बने। झूठ-कपट ना मन में हो,सबकी राय एकार्थक बने। कोई किसी को छल ना सके,दुष्टों का काम निरर्थक बने। बात सबको सच्ची कहना ‘विनोद’,छवि अपनी प्रेरणार्थक बने॥ परिचय–विनोद कुमार … Read more