एक वीर का आखरी खत
विजय कुमारमणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** लिख रहा हूँ,खत तुम्हें माँकलम न मिली तो खून से,अचंम्भित है दुश्मन,मेरे प्रचण्ड प्रहार से,लाशों के ढेर और खाली हथियार से। लगी है प्यास तो रक्त पी रहा हूँदुश्मन के आगे दीवार बन गया हूँ,गोली तो हमें भी लगी,पर डरा नहीं हूँसाँस रुक रही है,पर सिर झुकाया नही है। एक इंच भी … Read more