चटाई धूल वीरों ने तुझे

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़)******************************************************************** अरे चीनी अरे पाकी,हमें तुम क्यों उकसाते हो,सिंह सोए हुए हैं जो,उन्हें क्योंकर जगाते हो।श्वान की मौत मरते हो,हिन्द की सीमा में आकर-समझ आती नहीं तुमको,सदा ही हार जाते हो॥ तेरी बंदूक में है जितना,जोर अपनी भी लाठी में,बनाता शेर बेटों को,उर्वर हिन्द माटी में।अगर चाहें तुझे रे चाइना,पल में मसल … Read more

तुम्हारा प्रेम

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** तुम्हारा प्रेम श्वांसों में मेरे हरदम धड़कता है,मिला जो था वहां अनुभव,होंठों पर फड़कता है।कहूँ शब्दों में कैसे मैं,मिला जो था वहां मुझको- वो मेरे मन में रहकर प्यार से हरदम महकता है॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व … Read more

मेरे प्रियवर

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************************************** (रचना शिल्प:१६/१४) नेह नयन की आशाओं में,प्रिय तुमको ही पाती हूँ।लहराकर आँचल को अपने,गीत खुशी के गाती हूँll हर पल साँसों रहे समाए,नींद चुराई रातों की।चैन उड़ाकर दी सौगातें,मीठी-मीठी बातों कीllआशाओं के इस आँगन में,झूम-झूम इठलाती हूँ।लहराकर आँचल को…। प्यार मिला अरमान खिलें हैं,सपनों की इन राहों में।मिले उम्रभर मुझे … Read more

महान ग्रंथ

सुकमोती चौहान ‘रुचि’महासमुन्द (छत्तीसगढ़)*********************************************************************** दो महान है ग्रंथ,महाभारत-रामायण।जिसकी कथा महान,प्रतिष्ठित मान परायण।पुरुषोत्तम थे एक,सूर्यवंशी श्री राघव।लीलाधर थे एक,श्याम नटखट श्री माधव।इससे तो रसमय है नहीं,जग में कोई भी कथा।समा गई इस संसार की,इनमें ही सारी व्यथा। परिचय–श्रीमती सुकमोती चौहान का साहित्यिक नाम ‘रुचि’ है। जन्मतारीख-५ नवम्बर १९८२ एवं जन्म स्थान-भौरादादर है। वर्तमान में आपका बसेरा … Read more

हरियाली जो बोते

मनोरमा जोशी ‘मनु’ इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** धरती माता के आँचल में,हरियाली जो बोते,अमन चमन की,खुशियाली को,श्रम का बोझा ढोते।वो किसान होते,शीत-घाम-आंधी-वर्षा मेंहँसते कदम बढा़ते,खेत और खलिहानों के हीगुण गौरव ये गाते।पले धूल मिट्टी में जन्मे,इसमें ही मिल जातेअर्द्धनग्न तन भूखे रत हैं,किन्तु नहीं कुम्हलातेlअन्न देश को जुटा रहे हैं,ये किसान कहलातेलगे जूझने संघर्षों से,वे विश्राम न पाते।माँ … Read more

भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* २५ जून १९७५-यह तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला धब्बा हैI इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था,जो २१ मार्च १९७७ तक यानि २१ महीने तक चलाI क्यों लगा आपातकाल और क्या रहा उसका असर ? आपातकाल की घोषणा कानून व्यवस्था बिगड़ने,बाहरी आक्रमण और वित्तीय … Read more

थोड़ा-सा जी लेते हैं

प्रीति शर्मा `असीम`नालागढ़(हिमाचल प्रदेश)****************************************************************** आओ,थोड़ा जी लेते हैं,जीवन तो बस…विष का प्याला है,अमृत कर के पी लेते हैं। मौत तो आनी है,एक दिनउससे पहले,आओ थोड़ा जी लेते हैं। कितना खुद को,मारा पल-पलजीवन में सब,हारा पल-पल। जो बचा हुआ है,उसको हाथों में भरकर…सारी तमन्नाएं पी लेते हैं,आओ थोड़ा जी लेते हैं। किसका था इंतजार हमें,क्या पाया … Read more

न यूँ आजमाया करो

कृष्ण कुमार कश्यपगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** (रचना शिल्प:२१२ २१२ २१२ २१२) तुम मुझे देख कर मुस्कुराया करो।इस तरह दिल में तुम आया जाया करो। हम तुम्हारे हैं आशिक,नहीं बेवफा,तुम हमेशा न यूँ आजमाया करो। बस जमाने से मुझको मिली ठोकरें,दिल न तुम भी मेरा यूँ दुखाया करो। दूर होगा तिमिर देखना एक दिन,दीप चाहत के गर … Read more

गुलाब हो या दिल!

संजय जैन मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** मेरे दिल में अंकुरित हो तुम,दिल की डालियों पर खिलते होऔर गुलाब की पंखुड़ियोंकी तरह खुलते हो तुम।कोई दूसरा छू न ले तुम्हें,इसलिए काँटों के बीच रहते हो तुमफिर भी प्यार का भँवरा काँटोंके बीच आकर छू जाता है।इससे तेरा रूप और भी,निखार आता है॥ माना कि शुरू में काँटों से,तकलीफ होती … Read more

खुद हो जाते जार-जार

अनिल कसेर ‘उजाला’ राजनांदगांव(छत्तीसगढ़)********************************************************************* पिता ईश्वर का अनुपम उपहार हैं,माँ घर तो पिता संवारते परिवार हैं। नारियल-सा दिखते ये सदा ही कठोर,क्योंकि ये घर की होते छत और दीवार हैं। माँ होती जीवन की पहली पाठशाला,पिता होते ज्ञान व संस्कार के भण्डार हैं। ग़म अपना सारा छुपा कर रख ले अंदर,बच्चों को देते सिर्फ खुशी और … Read more