कठोर

डॉ.सरला सिंह दिल्ली *********************************************** मानव है कितना कठोर निर्दयी, दया नहीं आती है मौत पर भी। नहीं समझता पिता के जज्बात, कांधे पे बेटे के शव का बोझ भी। गाड़ियों की कमी नहीं आज तो, एम्बुलेंस से या भेजते कैसे भी। थमा दी डिस्चार्ज स्लिप उसको, कह दिया ले जाओ इसे कैसे भी। नहीं दया … Read more

प्यार हुआ है मुझे

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** अजब-सा नशा छाया है और खुमार हुआ है मुझे, लो अब मैं चीख़कर कहता हूँ प्यार हुआ है मुझेl रातभर अब करवटें बदल कर सोने लगा हूँ, हाँ,अब उसका बनकर उसमें ही खोने लगा हूँl बेचैन रहती है नज़रें मेरी तुझे देखने की खातिर, इश्क़-ए-सफ़र के सफ़र का हूँ मैं … Read more

दीर्घायु

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** नित्य समय से सोइये,जागें ऊषाकाल। यत्र-तत्र विहार करें,उठकर प्रातः कालll मंजन कुल्ला शौच कर,करें रोज नित स्नान। योग करें व्यायाम नित,पायें नित सम्मानll मात-पिता गुरु नमन करि,सरस्वती का ध्यान। इष्टदेव को नमन करि,धरें सभी का मानll बच्चे शिक्षा पर धरें,सबसे ज्यादा ध्यान। काम समय से पूर्ण कर,सदा उठाएं मानll रहो … Read more

ईर्ष्या

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* रत्नजड़ित मखमली मयान में,देखो छिपी हुई तलवार हूँ, जल के कोमल प्रवाह में,असीम छिपी हुई रमणीय-सी धार हूँ। गर्म रक्त से कलेजा ठंडा करना आता हैं,हाँ मैं ईर्ष्या हूँ, मंद-मंद मुस्कान लिए,मुझे तिल-तिल मरना आता हैं। मैं क्रूरता और बर्बरता का कृत्य कितना खिलवाती हूँ,उसर-सी हूँ मैं, तेरी त्याग-तपस्या अर्पित … Read more

गुजर

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** वक्त गुजरा है मेरा,मैं अभी नहीं गुजरा, मेरी खुशियों,गमों को ले के साथ ये गुजरा। इसने ही बनाये ये हालात मेरे अच्छे-बुरे, आते-जाते हुए हालातों को भी ये ले गुजरा। इसकी ही तर्ज पे बनते-बिगड़ते हैं रिश्ते, रिश्तों को बना के यही रिश्ते तोड़कर गुजरा। आता-जाता रहा ये … Read more

जलसंकट के दौर में याद आया ‘राखुंडा’

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** ‘राखुंडा नई पीढ़ी के लिए शायद नया शब्द हो,परंतु दक्षिणी पंजाब,हरियाणा व राजस्थान में दो दशक पहले तक यह जीवन का हिस्सा था। ‘राख’ और ‘कुंड’ शब्दों की संधि से बना ‘राखकुंड’ शब्द घिस-घिसकर ‘राखुंडा’ बना होगा शायद। घर में बर्तन-कासन मांजने वाला स्थान था राखुंडा,जहां जरुरत अनुसार गड्ढे या बर्तन … Read more

दीर्घायु

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** मिल जाए आशीष हमें, दीर्घायु बन जाएं जीवनभर परोपकार कर, लोगों के काम आएं। हृदय,अंतर्मन पुनीत कर, द्वेष का परित्याग करें छल,कपट को छोड़ नित, स्नेह की बौछार करें। जग में सारे अपने हैं, अपनों से पहचान मिले मंजिल कितनी भी पा जाएं, कभी न हम गुमान करें। कर्म से श्रेष्ठता … Read more

तेरे लिए

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* गम हैं बहुत यहाँ पीने के लिए, मगर खुशियाँ हैं कम यहाँ जीने के लिए। गर मिटा नहीं सकता गम किसी का,दो कदम तो चल, तेरी कोशिश ही बहुत है दर्द कम करने के लिए। जोआज नहीं वो कल होगा,आज से बेहतर कल होगा, जीवन के इस समय … Read more

लक्ष्मी की वापसी

डॉ.आभा माथुर उन्नाव(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************************** बात तब की है,जब मैं बनारस में डी.आई.ओ. एस. थी। वैसे तो नगर के सभी इन्टर कालेज मेरे अधीन थे,पर एक इन्टर कालेज की मैं पदेन प्रबन्ध संचालक थी। पदेन का अर्थ है कि उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार जो भी बनारस का डी.आई.ओ.एस. होता,वही उस विद्यालय का प्रबन्ध … Read more

जब तुम न होगे

रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* क़तरा-क़तरा पिघलेंगी रातें तब… ख़ामोश निगाहें ढूँढा करेंगी… रातों के काले सायों में तुमको…। चाँद का मायूस चेहरा देखकर, सितारों की आँखें भी नम होंगी, और मैं फिर से… बिखरे लफ़्जों को समेटकर… पिघलती रात की स्याही से फिर से, इक नज़्म लिखूँगी नाम तेरे…। हाँ! यही बात होगी… … Read more