खुशी

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** जीवन आधार है खुशी, सुखद उदगार है खुशी। कौन गम से दो-चार चाहता है होना, सभी का प्यार है खुशी। माता-पिता प्रथम कहलाना सौभाग्यसंग खुशी, संतान को खिलखिलाते देख मिलकर खिलखिलाना, अंदाज यै ख़ुशी। अपनी खुशी में तो, यह मिलती ही है। औरों की तरक्की से मिले उदारता संग … Read more

कविता बिखरी.है…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ पहाड़ों से गिरते झरनों में, कल-कल बहती नदियों में, कविता बिखरी पड़ी हैl प्रकृति की सुरम्य गोद में, पंछियों के मधुर कलरव में, कविता बिखरी पड़ी हैl महकते गुलाबी फूलों में, फल-फूलों से लदे वन-बगीचों में, कविता बिखरी पड़ी हैl भौरों के मधुर गुंजन में, रंग-बिरंगी उड़ती तितलियों … Read more

नज़रिया

निर्मल कुमार शर्मा  ‘निर्मल’ जयपुर (राजस्थान) ***************************************************** नज़र इसकी,नज़र उसकी नजारा इक,नज़रिये दो, मुक़ाबिल तो,है होना ही वजह हो,चाहे या ना होl कर है प्रार्थना नित ये परस्तिश रोज करता वो, ये भगवन देखे मूरत में महज़ बुत कहता उसको वोl शिवाले में जो शिव इसका संगे असवद है उसका वो, मगर जिद का ये आलम … Read more

आषाढ़ का एक दिन और मल्लिका

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ आषाढ़ का एक दिन मोहन राकेश जी का प्रथम ऐतिहासिक नाटक है,जो रंग शिल्प सम्बन्धी संभावनाओं के नए क्षितिज खोजता प्रतहत होता है। प्रत्येक लेखक का अपना जीवन दर्शन होता है,जिसे वह जीवन के विविध आयामों में स्पर्श करना चाहता है। मल्लिका आषाढ़ का एक दिन नाटक में मोहन राकेश … Read more

जल ही जीवन है

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** जल है भारी संकटग्रस्त, व्यर्थ पदार्थ वाहित मल औद्योगिक अपशिष्ट कीटनाशी पदार्थ, उवर्शकों के रासायनिक तत्व पट्रोलियम पदार्थ जिनसे जल जीवन की रक्षा होती है वे ही आज मृत्यु के कारण बन बैठे, देता टाइफायड,पीलिया,हैजा पेचिश,पेट के कीड़े,मलेरिया सब बीमारियों को न्यौता, गोमती का विषाक्त जल हो या … Read more

हाथ

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** इसी हाथ से काम को,देते हैं अंजाम। हाथ नहीं कुछ भी नहीं,नहीं होत है काम॥ इन हाथों से गढ़ दिए,सुन्दर देख जहान। ताकत फिर भी है अभी,नहीं बिके ईमान॥ मन्दिर-मस्जिद सब गढ़े,महल अटारी ताल। सड़क बाँध पुल सब बने,देखो हाथ कमाल॥ दुनिया के हर काम में,रहता मेरा हाथ। … Read more

माँ

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** घुट-घुटकर अब जी रही,बहा आँख का नीर, माँ तो निर्धन हो गई,बेटे हुए अमीर। बेटे की कोठी बनी,रखे किरायेदार, छप्पर में अब रह रही,बूढ़ी माँ लाचार। आज खड़ा वह पैर पर,आँके सबका दाम, चलना सीखा जो कभी,माँ की उँगली थाम। बच्चे घर से दूर तो,माँ को होती पीर, रूठे रह … Read more

जल ही जीवन है

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** जल जीवन का आधार है, जल कुदरत का श्रृंगार है। जल है तो हमारा कल है, जीवन में जरूरी जल है। बिन जल के नदिया बेकार, बहती नदियों में जल की धार। जल पर सबका अधिकार है, जल से सारा संसार है। जल आसमान से आता है, कभी सागर तक जाता … Read more

जिंदगी के रंग…

राजबाला शर्मा ‘दीप’ अजमेर(राजस्थान) ******************************************************************************************** कैसे-कैसे रंग दिखाती है जिंदगी, सपने मिटाती और सजाती है जिंदगी। हमने तो कसके के बांध के रखा था जेब में, रेत-सी हाथों से फिसल जाती है जिंदगी। हमको तो बद्दुआओं की आदत-सी हो गई, तेरी दुआएं हमको सताती है जिंदगी। एक जख्म भरा भी नहीं कि दूसरा मिला, क्या … Read more

मेरे नाना

प्रज्ञा गौतम ‘वर्तिका’ कोटा(राजस्थान) ********************************************* बहुत याद आते हैं नाना,जिनके सानिध्य-छाँव में बचपन के अनेक वर्ष बीतेl मन की अतल गहराइयों में दबी,पीले और भंगुर पृष्ठों पर उकेरी हुई रंग उड़ी चित्रकथाओं-सी बचपन की स्मृतियाँl एक धुंधली-सी स्मृतिl पांच वर्ष की छोटी-सी बच्ची मैं,नाना की उंगली थामे बाज़ार से गुजर रही हूँl कोई सज्जन रास्ते … Read more