न्यायपालिका की अग्नि-परीक्षा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे सर्वोच्च न्यायालय की इज्जत दांव पर लग गई है। पहले तो प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन-उत्पीड़न का आरोप लगा और अब एक वकील ने अपने हलफनामे में दावा किया है कि जस्टिस गोगोई को फंसाने के लिए कुछ ताकतवर लोगों ने यह षड़यंत्र रचा है। उस वकील ने … Read more

सुहानी शाम

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* शाम सुहानी आ गई,पंछी करते शोर। लौट रहे हैं नीड़ को,बाँध प्रीत की डोरll बैलों की घंटी बजे,जस वृन्दाबन धाम। ग्वालों की टोली लगे,संग श्याम बलरामll सतरंगी आभा लिये,बिखरे हो सिंदूर। अरुण किरण की लालिमा,देखो कुदरत नूरll शीतल मंद सुगंध पवन,और सुहानी शाम। बन जाऊँ मैं राधिका,तुम बन जाओ श्यामll … Read more

ये कैसी प्यास है

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ भावना और भाव, दोनों में अंतर हैl प्यार और प्यास, दोनों आपस में क्या एक-दूसरे के पूरक हैं ! मैं कुछ समझा, और न समझा। मुझे कुछ ज्ञात ही, नहीं हो रहा हैll शायद आप ही, समझा सकें अब हमें। लेकर यही आस, आये हैं आपके पास। की रुबरू होकर, हमें … Read more

चली गिलहरी

डॉ.जियाउर रहमान जाफरी नालंदा (बिहार) *********************************************************************** चली गिलहरी कवि सम्मेलन में एक कविता पढ़ने, थी इच्छा सम्मान की इतनी लगी रातभर रटनेl आई जैसे ही माइक पर भूल गई वो रचना, उलट-पुलट वो पढ़कर आई सही-सही था पढ़नाl वहीं पे था एक बंदर बैठा बोला कवि जी सुनिए, आइंदा जब जाएं कहीं भी लिखकर उसको … Read more

सिसकता किसान

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** भंडार अन्नपूर्णा का बढ़ाएं, खेतों से काट फसलें जमा करता है खलिहान, कोटि-कोटि जनता का अन्नदाता है मगर अपने ही घर में, सिसकता किसान…,सिसकता किसानl दारिद्रय जिसकी व्यथा रही, क्या कहे वह अपनी अनकही कर्ज़ों के बोझ तले, हृदय में शूल गड़े संयम पे वश ना चले, राह कोई … Read more

मुझे तुम याद आते हो

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* यूँ ही बिन मौसम की बरसातें मेरी छत पर टप-टप करती बूंदें जहन में जाने कैसी हुलस-सी, जब भर जाती हैं मुझे तुम याद आते हो…। घड़ी-घड़ी तुम्हारी राह तकती बेसब्र आँखें,हर शय में जब तुम्हें ही तलाशती हैं, मुझे तुम याद आते हो…। भीगे से मन की देहरी पर डेरा … Read more

कीजिए खूब ‘मतदान’

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* कीजिए मिलकर प्रेम से,खूब मतदान, बनेगा इसी से अपना भारत देश महान। बेहतर भविष्य चाहिए, ‘मत’ दे आईए, नेताओं को समझिए,देशहित सोचिए। बदलाव लाना है तो कदम बढ़ाने होंगे, ‘मत’ अमूल्य है,कभी जाया न कीजिए। सोचें जो क्षेत्र-देश की, ‘मत’ उसे ही दीजिए, दागियों को सीधे अब ‘पराजित’ कीजिए। अपराधियों … Read more

पेट की आग

शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’ मेरठ (उत्तरप्रदेश) ****************************************************** बल-प्रयोग के जहरवाद से, दु:खी पेट की आग। उत्पीड़न के नसतरंग का नहछू और नहावन, छुआछूत की दाल-पिठौरी पत्थर का परिछावन, कुमुदिनियों के अंग-अंग पर ‘मैं-भी’ का है दाग। भूख-प्यास की दोपहरी की साँस-साँस वैरागी, नहर-निरीक्षण-घर में सेवा रात बिताई भागी, गहन अँधेरे में मंत्रालय खूब पकाये पाग। लोक-लुभावन … Read more

शाप देने का सुख

अरुण अर्णव खरे  भोपाल (मध्यप्रदेश) *********************************************************************** पुरातन इतिहास में निर्मल हृदय,सच्चरित्र और गुणवान व्यक्तियों द्वारा अनैतिक और धर्मविरुद्ध कार्य करने वालों को शाप दिए जाने के अनेक उदाहरण मिलते हैं,पर कलियुग में शाप–लोगों ने पहली बार सुना। जिस कलियुग में चरित्र और हृदय की पावनता का पूरी तरह से टोटा हो,उस युग में शाप दिया … Read more

दरवाजे की चीखें

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************** मेरी डायरी-भाग ३ रात के 9 बज रहे थे और वह निर्दयी नशे में धुत मेरे दरवाजे को ईंटों से पीट रहा था,जिसकी ध्वनि मेरी झुग्गियों में रह रहे किरायेदारों के भी कान फाड़ रही थी। वह ईंटों के प्रहारों के साथ-साथ गाली-गलौज भी कर रहा था। … Read more