चलते ही जा रहे
रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ज़िन्दगी शुरू हुई तबसे छलते ही जा रहे हैं।चलना सीखा जबसे चलते ही जा रहे हैं। उसूलों को निभाते जिस्म थक चुका हैअब बच्चों से हाथ मलते ही जा रहे हैं। कितना कमाया कितना गंवाया याद नहीं,अपने ही घर में बिलखते ही जा रहे हैं। एक वो ज़माना था बड़ों की बात मानते … Read more