चलते ही जा रहे

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ज़िन्दगी शुरू हुई तबसे छलते ही जा रहे हैं।चलना सीखा जबसे चलते ही जा रहे हैं। उसूलों को निभाते जिस्म थक चुका हैअब बच्चों से हाथ मलते ही जा रहे हैं। कितना कमाया कितना गंवाया याद नहीं,अपने ही घर में बिलखते ही जा रहे हैं। एक वो ज़माना था बड़ों की बात मानते … Read more

पुरअसर जिंदगी

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** सितारे भरे हो नजर जिंदगी।जरा गम मिले तो जहर जिंदगी। खुशी में न बहके न गम में जले,समुंदर माफिक लहर जिंदगी। फकीरा बने रूह सूफी रहे,रहो मौज में बह गुजर जिंदगी। जलालत भरा रुतबा भी न हो,सुकूँ से गुजरती डगर जिंदगी। मुख्तसर कहाँ कुछ रहे है जमी,भरे है नेमत ओ कहर जिंदगी। अमन … Read more

तुझे पा कर

डॉ. रामबली मिश्र ‘हरिहरपुरी’वाराणसी(उत्तरप्रदेश)****************************************** पा तुझे मिलती खुशी अनमोल है।मधुर रस में अति पगे प्रिय बोल हैंll तू तमन्ना तू अपेक्षा अति सुघर,तू ही मेरा स्नेहमय मधु घोल है। बात करके प्राप्त जो निःशब्द वह,रस भरा आनंद तू अनमोल है। मन किया करता सदा नित बात हो,बिन रुकावट बोल तू अनमोल है। काश! हम दोनों … Read more

पतवार को मत दोष दे

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* यदि नाव में सुराख है पतवार को मत दोष दे।शोला नहीं तू राख है अंगार को मत दोष दे। यूँ आग से खेले नहीं अब भी समय है मान ले,अब दांव पर ही साख है सरकार को मत दोष दे। ये क्यों किसानों के मसीहा बन रहे हैं आढ़ती,खतरे में उसका … Read more

दिल में है ख़ुदा तो राम भी है

शिखा सिंह ‘प्रज्ञा’लखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** मेरी ग़ज़लों में नया आयाम भी है,इनके जरिए प्यार का पैग़ाम भी है। खो चुके हैं देख लो हम इस जहां में,ढूंढना खुद को हमारा काम भी है। मैं गिरफ़्तारे मुहब्बत हो गई हूँ,प्यार का सर पर मेरे इल्ज़ाम भी है। अम्न के यूँ तो पुजारी सब हैं लेकिन,जिस तरफ़ भी … Read more

लिखूँगी भाग्य मैं खुद का

तृषा द्विवेदी ‘मेघ’उन्नाव(उत्तर प्रदेश)***************************************** (रचना शिल्प:विधाता छन्द,बहर-१२२२×४,रस-वीर) मुझे जाना शहर ये छोड़ फिर वापस नहीं आना,लिखूँगी भाग्य मैं खुद का यही संकल्प है ठाना। नहीं रुकना सफर चाहे मुझे तन्हा गुजरना हो,अकेले चल अकेले ही मुझे हर लक्ष्य है पाना। न घबराओ यूँ मुश्किल देख तुम बढ़ते चले जाओ,हुआ वो ही सफल इंसां,न जिसने हार … Read more

अब हल निकलना चाहिए

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* खेत के कानून का अब हल निकलना चाहिए।टहनियां तोड़े बिना ही फल निकलना चाहिए। राजधानी घिर चुकी अलगाव के अंगार में,आग का करने शमन दमकल निकलना चाहिए। बैठ कर चर्चा करो अपनी कहो उनकी सुनो,पाटकर खाई हमें समतल निकलना चाहिए। कूप की बुनियाद में ही आब की तासीर है,जांच कर देखो … Read more

हम तुम्हारे हो गए

सुधा श्रीवास्तव ‘पीयूषी’प्रयागराज (उत्तरप्रदेश)************************* काव्य संग्रह हम और तुम से एक दिन देखा तुम्हें बस हम तुम्हारे हो गए,देखकर मौजों को भी तेरे सहारे हो गए। देखकर तन्हा जमाना ऐसे पीछे पड़ गया,बहता तिनका देखकर उसके सहारे हो गए। नहीं कोशिश किया हमने कि आगे क्या है देख लूँ,मेरा एतबार था यह कि अब तुम … Read more

ख़्वाब

राजेश मेहरोत्रा ‘राज़’लखनऊ(उत्तरप्रदेश)*************************** काव्य संग्रह हम और तुम से ए काश ! तेरी जुल्फ़ें महकी हो हल्की-हल्की।मध्यम-सी रोशनी में हो चाल बहकी-बहकी। सागर से गहरी आँखें उसपे घटा का काजल,झीना-सा तेरे तन पर लिपटा हवा का आँचल। फूलों से भी हो महका खिलता बदन ये तेरा,हो शोखियाँ कुछ ऐसी जूं खिलता हुआ सवेरा। हो सादगी … Read more

चलो नज़रें दो-चार करते हैं

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ काव्य संग्रह हम और तुम से चलो नज़रें दो-चार करते हैं।एक-दूसरे से प्यार करते हैं। बहुत जी चुके तक़रार प्यार में,अब सरेआम इज़हार करते हैं। जिस्त से हटाओ ग़मों के घेरे को,अब नाव अपनी पार करते हैं। ज़माने से डरने की ज़रूरत नहीं,लड़ने को खुद ही तैयार करते हैं। जो हक़ है हमारा … Read more