प्यार का दीप इक जलाना है
विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* जिन्दगी तू वो आशियाना है, जिसमें ख़्वाबों का इक खजाना है। अपने चारों तरफ अंधेरा है, प्यार का दीप इक जलाना है। इस नये दौर का विरानापन, फिर नयी आस से बसाना है। देवकी फिर कन्हाई को जन्मो, कलयुगी कंस को मिटाना है। ऐ ‘विभा’ छोड़ के न जा इसको, लुट … Read more