प्यार का दीप इक जलाना है

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* जिन्दगी तू वो आशियाना है, जिसमें ख़्वाबों का इक खजाना है। अपने चारों तरफ अंधेरा है, प्यार का दीप इक जलाना है। इस नये दौर का विरानापन, फिर नयी आस से बसाना है। देवकी फिर कन्हाई को जन्मो, कलयुगी कंस को मिटाना है। ऐ ‘विभा’ छोड़ के न जा इसको, लुट … Read more

तेरी कहानी ढूँढता हूँ!

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** वक्त के अखबार में तेरी कहानी ढूँढता हूँ। उम्र के इस आइने में इक निशानी ढूँढता हूँ। दौर मिट जाएँ भले मिटते नहीं जज्बात दिल के, ले चले उस दौर में फिर वो रवानी ढूँढता हूँ। जब तेरी महफ़िल में लुटकर दूर बैठा रौशनी से, रात के साये तले … Read more

अश्क़ बहते रहे रातभर…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** अश्क़ बहते रहे रातभर याद है, इश्क़ में दर्द का वो सफर याद है। जिस जगह पर मुझे छोड़कर तुम गये, आज भी वो क़सम से डगर याद है। राह तकता रहा इक झलक के लिए, और जलती रही दोपहर याद है। मैं तुझे देर तक देखता ही रहा, … Read more

बात करना ठीक है क्या

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* सुब्ह के निकले हुये हो,रात करना ठीक है क्या, हर घड़ी इक ख्वाब की ही बात करना ठीक है क्या। मत बढ़ो आगे,जरा ठहरो,वहां पर आसमा है, लांघ कर सीमा किसी पर घात करना ठीक है क्या। हो बड़े तैराक लहरों की कलाएं जानते हो, पर समन्दर में बला उत्पात करना … Read more

बहुत बिखर गया हूँ

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** बहुत थका हुआ हूँ,अभी बहुत बिखर गया हूँ। सफ़र पहले अच्छा था अब किस सफ़र गया हूँ। तेरे आने से पहले घर बहुत अच्छा था, जब से आई है लगता मैं बस भर गया हूँ। जिंदगी में कैसी तन्हाई मिली है आज, आज इन हालातों से मैं भी गुजर गया हूँ। … Read more

निश्चित सूरज कल निकलेगा

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’ लखीमपुर खीरी(उप्र) **************************************************** कोशिश कर ले हल निकलेगा। पत्थर से भी जल निकलेगा। बहुत घना तम छाया लेकिन- निश्चित सूरज कल निकलेगा। घूम रही है मौत सड़क पर- बाहर बस पागल निकलेगा! मत घबराकर साहस त्यागो- धीरज रख,हर पल निकलेगा। धर्म,जाति में भटक गए तो- हर प्रयास निष्फल निकलेगा। अगर रहे तुम,अपने … Read more

समय का फेर

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************************** समय का फेर न पहले समझ में आया था। वही है आज सगा जो कभी पराया था। वो रात आ न सकी आज तक हक़ीक़त में, वो रात जिसको कभी ख़्वाब में सजाया था। वो राज़ सब पे अयां हो गया जमाने में, वो राज़ जिसको कभी … Read more

इश्क़ में क्यों उसे…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** इश्क़ में क्यों उसे ग़मज़दा कर दिया, सोचता हूँ कि मैंने ये क्या कर दिया। बातें करता रहा वो मुहब्बत भरी, और मैंने उसे अनसुना कर दिया। इश्क़ की दास्तां छेड़कर आपने, दर्द को बेवजह दो गुना कर दिया। ज़िस्म दो हैं भले जान तो एक है, क्यूँ ज़माने … Read more

सब ख़ैरियत तो है

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************  मिली हर शह्र को वीरानियाँ सब ख़ैरियत तो है ? सिफ़ारिश पा रही हैं दूरियाँ सब ख़ैरियत तो है ? बने फिरते थे सैलानी ज़माने भर के मुल्क़ों में, उड़ानों पर लगी पाबंदियाँ सब ख़ैरियत तो है ? जहाँ दिन रात रौनक रश्क़ करती थी जहां भर … Read more

खुदा गवाह है महँगी हुई दुआ कितनी

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** (रचना शिल्प:१२१२ ११२२ १२१२ २२) जहां में आज है फैली हुई वबा कितनी। भरी है जहर से ये आज़ की हवा कितनी। नहीं तुम्हें है जरूरत किसी से डरने की, करी है माँ ने तुम्हारे लिए दुआ कितनी। नहीं किसी की चले सब उसी की मर्जी है, खुदा गवाह … Read more