अनझेले संघर्ष
विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ आते हैं क्षण-क्षण जीवन में,अनझेले संघर्ष। हर आने वाले को मैंने,समझा अंतिम द्वन्दकिन्तु सदा नूतन ही आये,ज्यों कविता के छन्द।आदि अन्त कुछ मिला न इनका,बीते अनगिन वर्ष…। कहां ठहर कर कह दूं,आया,अब मंज़िल का छोरजीत लिये सब द्वन्द जगत के,कर दूं ऐसा शोर।जब है द्वन्द सामने,बनता,उद्भव भी अपकर्ष…। भावी के भय वर्तमान में,हँस … Read more