धरती को अभिमान है
विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ गणतंत्र दिवस विशेष…. देख-देख जिसकी सम्प्रभुता,धरती को अभिमान है।कण-कण वाणीमय हो कहता,भारत देश महान है,मेरा देश महान है॥ यहां प्रकृति की है दिनचर्या,संयम में रहते दिन-रात।धरती की आग्या पर चलते,जाड़े,गर्मी औ बरसात।स्वयं इसे संचालित करती,एक परोक्ष शक्ति अग्यात।यहां चरित्र दिव्य जन-जन के,पावन धर्म-कर्म विख्यात।उज्ज्वल तन निर्मल मन प्रति जन,देवों का वरदान है।कण-कण…॥ सदा … Read more