अपना-पराया
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** नववर्ष विशेष….. जीवन का हर दिन मैं हो जैसे नववर्ष मनाता हूँ।दुखों को रखूँ दूर-दूर खुशियों के महल बनाता हूँ॥ धन की हानि करे सबकी हम वो नववर्ष मनायें क्यों ?करें दिखावा दौलत का ये झूठा दर्प दिखायें क्यों ?पश्चिम को मैं क्यों मानूँ बस गीत पुरबले गाता हूँ,जीवन का हर … Read more