भारतीयता के डी.एन.ए. पर राष्ट्रवादी चिंतन

डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदीइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************** भारतीय डी.एन.ए. आज चर्चा का विषय बना हुआ है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के अनुसार सभी भारतीयों का डी.एन.ए. एक है,चाहें वो किसी मत के मानने वाले हों। स्वयं के भीतर बाबर का डी.एन.ए. मानने वालों को यह बात कितनी पचेगी यह तो समय ही बतायेगा। भारत ने सदा … Read more

पिता के परिश्रम-प्रेरणा की महती भूमिका

सविता धरनदिया(पश्चिम बंगाल)**************************** ‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष….. कहा गया है कि,’होनहार बिरवान के होत चिकने पात’ यानि कि अच्छे माता-पिता की अच्छी संतान ही होती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि,एक परिवार में बच्चों की देखभाल करने के लिए माता-पिता दोनों की बराबर भूमिका है। पहले संयुक्त परिवार होते … Read more

भविष्य निर्माता उत्पीड़न व शोषण के शिकार

वन्दना शर्मा’वृन्दा’अजमेर (राजस्थान) ***************************************** निजी विद्यालयों में भारतवर्ष का ७० फीसदी से अधिक भविष्य तैयार हो रहा है और उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है निजी शिक्षक। निजी विद्यालय खोलने वाले भी अच्छे पूंजीपति वर्ग होते हैं,और उसमें पढ़ने वाले बच्चे भी मोटे पूंजीपतियों के होते हैं और मोटी मोटी होती है इन शालाओं की फीस,मगर … Read more

नरसिंहराव के प्रति कांग्रेस की कृतघ्नता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत के प्रधानमंत्री रहे पामुलपर्ती वेंकट नरसिंहरावजी का इस २८ जून को सौवां जन्मदिन था। प्रधानमंत्री बनने के पहले वे विदेश मंत्री, गृहमंत्री,रक्षा मंत्री और मानव संसाधन मंत्री रह चुके थे। १९९१ में जब वे प्रधानमंत्री बने तो तीन पड़ौसी देशों के प्रधानमंत्रियों ने पूछा कि क्या राव साहब इस पद को … Read more

राजनीति महज ‘भविष्य’ या वैचारिक संघर्ष का मंच ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दल में ब्राह्मण चेहरा रहे जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने पर कांगेस नेता शशि थरूर ने एक सवाल उठाया था कि क्या राजनीति विचारविहीन भविष्य (कॅरियर) हो सकती है ? क्या सियासी दल बदलने से व्यक्ति की वैचारिक प्रतिबद्धता भी आईपीएल में दल … Read more

‘भाषा’ का दिवस..अंधी दौड़

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** अपनी संस्कृति और संस्कारों को जब हम स्वयं अपने जीवन और लोक व्यवहार में नहीं ला पा रहे हों और उस पर भी पश्चिमी खुलेपन के लिए लाल कालीन बिछाने के बाद यह अपेक्षा करना कि हमारी नई पीढ़ी उस आकर्षण से बिल्कुल अछूती रहकर हमारी अपनी पारंपरिक नैतिक मान्यताओं से चिपकी … Read more

क्या गारंटी कि,अनाज-वितरण में धांधली नहीं होगी !

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* केंद्र सरकार और दिल्ली की सरकार के बीच आजकल अजीब-सा विवाद चला हुआ है। दिल्ली की केजरीवाल-सरकार दिल्ली के लगभग ७२ लाख लोगों को अनाज उनके घरों पर पहुंचाना चाहती है लेकिन मोदी सरकार ने उस पर रोक लगा दी है। इन गरीबी की रेखा के नीचे वाले लोगों को ‘प्रधानमंत्री गरीब … Read more

सम्बन्ध-बंधनों से परे

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** विश्व सौहार्द दिवस स्पर्धा विशेष…. सम्बन्ध शब्द का क्या अर्थ होता है ?… ‘सम्यक्’ का अर्थ पूरी तरह से,चारों ओर से अथवा परिपूर्ण। अर्थात सम्बन्ध शब्द का अर्थ होता है, ‘चारों ओर से बंधन’,’सब प्रकार से बंधन’ अथवा ‘परिपूर्ण बंधन।’संसार में माता-पिता,भाई-बहन,जीजा,दामाद,बाप-बेटी,माँ-बेटी आदि) को हम लोग सम्बन्धी (रिश्तेदार,नातेदार) कहते हैं।हर … Read more

वीरता,दृढ़ता का दूजा नाम ‘झाँसी की रानी’

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस विशेष…. रानी लक्ष्मीबाई (जन्म-१९ नवम्बर १८२८, मृत्यु-१८ जून १८५८) मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और १८५७ की राज्य क्रान्ति की द्वितीय शहीद वीरांगना थीं। उन्होंने सिर्फ २९ वर्ष की उम्र में अंग्रेज साम्राज्य की सेना से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हुईं। बताया जाता है कि ये सिर … Read more

समझ नहीं आता… सोच को क्या हो गया!

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** एक तरफ हम कहते हैं कि लड़कियों को पढ़ाओ,और पढ़ाना भी चाहिए क्योंकि एक लड़की को पढ़ाने का मतलब है,पूरे परिवार को पढ़ाना, मगर जो हालात बने हुए हैं,वो देखते हुए हर माँ-बाप बुरी तरह से डर के साए में जीता है। जब तक बिटिया घर न आ जाए,दिल अनगिनत आशंकाओं से … Read more