झूठ हँस रहा आज
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** सच्चाई रोने लगी,झूठ हँस रहा आज। दर्पण में वह अक्स है,जैसा दिखे समाजll कानूनों को रोंदकर,आगे बढ़ता काल। शांति नहीं,हैं आजकल,रोज़ नये जंजालll बहकावे अस्तित्व में,सच विलुप्त है आज। निर्लज्जी इंसान को,किंचित भी ना लाजll बाहर सब कुछ स्वच्छ है,भीतर व्यापक मैल। कर मक्कारी भाग लो,पकड़ो पतली गैलll शंका … Read more