सजग नहीं हैं लोग
वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरीकुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ******************************************** ‘कोरोना’ से भी अधिक, घातक थी वह भूख।जिसके कारण राह में,प्राण रहे थे सूख॥ सभी घरों में बंद थे,थी दुनिया बेहाल।कोई भूलेगा नहीं,मौतों का यह साल॥ वे भी तब आये नहीं,अपने थे जो खास।कोरोना लेकर भला,कैसे आते पास॥ याद करेगा देश यह,सरकारों की भूल।मदिरालय को छूट थी,बंद रहे स्कूल॥ रोज़ी-रोटी … Read more