‘नीर’ से साँसें

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** ‘नीर’ लिए आशा सदा,नीर लिए विश्वास।नीर से साँसें चल रही,देवों का आभास॥ अमृत जैसा है ‘शरद’,कहते जिसको नीर।एक बूंद भी कम मिले,तो बढ़ जाती पीर॥ नीर बिना जीवन नहीं,अकुला जाता जीव।नीर फसल औ’ अन्न है,नीर ‘शरद’ आजीव॥ नीर खुशी है,चैन है,नीर अधर मुस्कान।नीर सजाता सभ्यता,नीर बढ़ाता शान॥ जग की रौनक … Read more

स्वागत सावन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************************************* स्वागत सावन मास का,अभिनन्दन शिवधाम।ग्रीष्मातप आहत धरा,बरसे नभ घनश्याम॥ पावस ऋतु स्वागत करे,बढ़कर सावन मास।शिव सुन्दर भावन जगत,सावन मन आभास॥ चमक रही घन बिजुरियाँ,दादुर मुख मुस्कान।चला कँवरिया जलभरण,हरिहर भोले गान॥ सुख-दु:ख का गमनागमन,नवजीवन सौगात।पतझड़ बस अहसास बन,फिर सावन बरसात॥ शीतल मंद समीर नित,कहीं धूप कहँ छाँव।उमर घुमड़ बरसे घटा,समझो … Read more

कृष्णा प्रेम की बाँसुरी

प्रिया देवांगन ‘प्रियू’ पंडरिया (छत्तीसगढ़) *********************************************************************** माखन मुख लिपटा हुआ,मैया पकड़े कान।बाल रूप है कृष्ण का,करे सभी सम्मानll बैठे कदम्ब पेड़ पर,करे राधिका तंग।सुना रहे मुरली मधुर,बैठ गोपियों संगll कृष्ण प्रेम की बाँसुरी,है राधा के नाम।पावन सच्चा प्रेम है,जैसे चारों धामll गीत प्रेम के गा रहे,सारे मिलकर आज।दौड़ी आई राधिका,छोड़े सारे काजll धड़कन में है … Read more

हरी-भरी सुष्मित प्रकृति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ****************************************************************** हरी-भरी सुष्मित प्रकृति,है जीवन आधार।करें सुरक्षित हम उसे,खिले खुशी संसारll हरीतिमा छाये धरा,स्वच्छ मिले नित वायु।रोगरहित प्राणी जगत,बढ़े जिंदगी आयुll वन पादप कर्तन धरा,बंद करें तज स्वार्थ।तरुकानन पर्वत सरित,बस जीते परमार्थll अंधे बन हम लोभ में,किया प्रकृति का नाश।कहर प्रदूषण तड़पते,धरती अरु आकाशll मानवता नैतिक पतन,भौतिकता उत्थान।हरी-भरी धरती फलित,है … Read more

दिखलाते हैं रास्ता

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’कोरबा(छत्तीसगढ़)******************************************** गुरु बिन ज्ञान नह़ीं मिले,बतलाते हैं सार।डगमग होती नाव को,गुरु ले जाएँ पार॥ दिखलाते हैं रास्ता,देते शुद्ध विचार।गुरु के चलते हम सदा,पाते हैं आधार॥ नाम राम का बाद में,पहले गुरु को जान।दुनिया में गुरु को सदा,अपना स्वामी मान॥ मिल जाए गुरु की कृपा,मिट जाए अँधियार।सहज सरल जीवन बने,मिलता ज्ञान अपार॥ इस दुनिया … Read more

मीरा और रुक्मिणी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)****************************************************************** इक मीरा इक रुक्मिणी,एक कृष्ण सरकार।ये याचक सी द्वार पर,उसका है अधिकार॥ विधि सम्मत है रुक्मिणी,मधुसूदन कल्यानी।राजपाट तज आ गई,ये महलों की रानी॥ मधुसूदन के सामने,संकट है गंभीर।स्वयं निशाना एक हैं,सम्मुख हैं दो तीर॥ ये मीरा वो रुक्मिणी,किसको लूँ अपनाय।कहिये किसको त्याग दूँ,गुरुवर करें सहाय॥ गुरुवर यूँ कहने लगे,सुन ले नन्दकिशोर।रात गए … Read more

गुरु:मिले उसे सम्मान

राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’टीकमगढ़(मध्यप्रदेश) ********************************************************************* आज दिवस गुरु पूर्णिमा,मना रहे हम-आप।इष्ट मंत्र का नित्य ही,करिये मन से जाप॥ गुरु की जो सेवा करे,मिले उसे सम्मान।गुरु की ही आशीष से,बनता शिष्य महान॥ गुरु सदैव ही बांटता,निज सुगंध ज्यों फूल।उनके ही सद् ज्ञान से,मिट जाते जग-शूल॥ परिचय-राजीव नामदेव का उपनाम ‘राना लिधौरी’ हैl जन्म तारीख १५ जून १९७२ … Read more

हे कृपानिधान

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)******************************************************************** भव बाधा सब दूर हो,जीवन आठों याम।सद्गुरु दीन दयाल हे,शत्-शत् करूँ प्रणाम॥ भक्ति ज्ञान दो नाथ जी,पूजन सुबहो शाम।करूँ अराधन आपकी,हे मेरे श्री राम॥ भवबंधन सब दूर हो,हे प्रभु कृपा निधान।चरण शरण अब राखिए,मैं निर्बल नादान॥ मन को जागृत कीजिये,मन में शक्ति अपार।मन से ही ज्ञानी बने,जीत चलो संसार॥ कृति … Read more

अरुणिम मुख मुस्कान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************************************** खुशियों की पहचान वह,अधरों पर मुस्कान।जीवन जीने की कला,मानक नित सम्मानll सहयोगी संघर्ष की,साहस देती मुस्कान।स्वीकृति की नित मापिका,नव जीवन आधानll समरसता नित सूचिका,मौन मन्द मुस्कान।निशिचन्द्र की चाँदनी,सुखदा जीवन दानll राहत चाहत जिंदगी,सुख-दु:ख का प्रतिमान।सरला सहजा हर दशा,आलोकित मुस्कान॥ समाधान हर आपदा,शत्रुञ्जय ब्रह्मास्त्र।प्रीति रीति अस्मित अधर,दुर्जय है यह शस्त्र॥ … Read more

ज्ञान मिले तो जग मिले

कृष्ण कुमार कश्यपगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** जग में शिक्षा की सदा,होती जय-जयकार।कर्म धर्म धन है यही,है जीवन का सार॥ यह धन जग में है बड़ा,दूजा क्या अनमोल।ज्ञान कभी बिकता नहीं,आँखें अब तो खोल॥ गीता की वाणी यहाँ,इसमें चारों धाम।ज्ञान मिले मिल जाय सब,सोच-समझ कर काम॥ लूट सको तो लूट लो,जहाँ ज्ञान की खान।ज्ञानवान बनना तुम्हें,तो कर … Read more