जीवनभर लोगों को ज्ञान दिया

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** स्वामी विवेकानंद भारत में पैदा हुए महापुरुषों में से एक है। अपने महान कार्यों द्वारा उन्होंने पाश्चात्य जगत में सनातन धर्म,वेदों तथा ज्ञान शास्त्र को काफी ख्याति दिलाई और विश्वभर में लोगों को अमन तथा भाईचारे का संदेश दिया।एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले नरेंद्रनाथ अपने ज्ञान तथा तेज के … Read more

संसद और विस दृढ़ संकल्प कर लें तो अंग्रेजी की गुलामी तत्काल खत्म

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* गुजरात के उच्च न्यायालय में भाषा के सवाल पर फिर विवाद खड़ा हो गया है। एक पत्रकार विशाल व्यास ने गुजराती में ज्यों ही बोलना शुरु किया, जजों ने कहा कि आप अंग्रेजी में बोलिए। व्यास अड़े रहे। उन्होंने कहा कि मैं गुजराती में ही बोलूंगा। जजों ने कहा कि संविधान की … Read more

हिन्दी योद्धा:बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री

डॉ. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)************************************* जिन दिनों हिन्दी नवजारण के अग्रदूत कहे जाने वाले भारतेन्दु बाबू हरिश्चंद्र, गद्य खड़ी बोली में लिख रहे थे,किन्तु कविता के लिए ब्रजभाषा को ही सबसे उपयुक्त मान रहे थे,उन्हीं दिनों बिहार के बाबू अयोध्या प्रसाद खत्री ने कविता के लिए भी खड़ी बोली अपनाने का आन्दोलन चलाकर अपनी मौलिक और … Read more

किसानों को समृद्ध बनाने में बहुत कुछ करना बाकी

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष….. अनादिकाल से ही सभी जगह धरती पर कृषि का प्रचलन है,साथ ही उस समय से ही कृषि कार्य करने वाले को कृषक कह कर पुकारने लगे। कालान्तर में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में कृषक को भूमिपुत्र,हलधर,खेतिहर,अन्नदाता के अलावा किसान नाम से भी सम्बोधित किया।सर्वविदित है … Read more

‘इत्र’ की बदबूःराष्ट्रीय शिष्टाचार

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* इत्र से कितनी बदबू फैल सकती है,यह दुनिया को पहली बार पता चला। कन्नौज के इत्रवाले जैन परिवारों पर पड़े छापों ने इत्र के साथ उत्तरप्रदेश की राजनीति की बदबू को भी उजागर कर दिया है। सच्चाई तो यह है कि,इन छापों ने भारत की सारी राजनीति में फैली बदबू को सबके … Read more

किसने किस पर हद कर दी…!

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष….. हमारे देश के कृषक भी ऋृषि हैं कृषक भी तप करते हैं तपती धूप में,बारिश में। आंधी,तूफान व बाढ़ से जूझता है,अपने लहलहाते खलिहानों को प्रकृति की आपदाओं में तहस-नहस होते देख शांत भाव से देख कभी हौंसला नहीं गंवाया,न ही प्रकृति सौंदर्य को निहारने,संवारने … Read more

‘समाजवादी इत्र’ और इत्र का ‘भ्रष्टाचारी समाजवाद’..!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** उत्तर प्रदेश के कानपुर से राज्य में विधानसभा चु्नाव के पहले ‘भ्रष्टाचार के इत्र’ की जो कहानियां सामने आ रही हैं,वो किसी परी कथा-सी हैं। इक्कीसवीं सदी के विदा होते इक्कीसवें साल में शबाब पर है,वो भ्रष्टाचार है। जो कुछ घट रहा है,वो किसी दिवा स्वप्न के ‘साकार’ होने जैसा है। मसलन … Read more

‘मितव्ययिता’ मतलब कंजूसी नहीं

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** हमारी संस्कृति में मितव्ययिता व दानशीलता का बहुत महत्व है। मितव्ययिता हमें जीवन में सादगी,संयम,अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण सिखाती है,तो दानशीलता हमें सिखाती है कि सद्कार्य के लिए आवश्यकता के समय पर जो भी संभव हो,जितना भी संभव हो,अवश्य दें।याद रखें मितव्ययी का मतलब कंजूस नहीं होता है,बल्कि अनावश्यक खर्च न … Read more

नई शिक्षा नीति:नए पंख,नया आसमान

मंजू भारद्वाजहैदराबाद(तेलंगाना)******************************************* भारतवर्ष का पौराणिक इतिहास इतना गौरवपूर्ण रहा है कि इसके जिस क्षेत्र की चर्चा की जाए,वही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ और उत्कृष्ट व्यवस्था मानी जाती रही है । जो इतिहास का सत्य भी है। भारतवर्ष में प्रचलित शिक्षा व्यवस्था १९७८ तक भारत वर्ष में शिक्षा का बहुत ही सीमित दायरा था- सिविल, मैकेनिक,इलेक्ट्रिकल,मैकेनिकल और … Read more

धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून जरुरी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* कर्नाटक की विधानसभा ने धर्म-परिवर्तन विरोधी कानून पारित कर दिया है। भाजपा ने उसका समर्थन किया है और कांग्रेस ने उसका विरोध! इस तरह के कानून भाजपा-शासित कई अन्य राज्यों ने भी बना दिए हैं और कुछ अन्य बनाने जा रहे हैं। कर्नाटक के इस कानून के विरोध में कई ईसाई संगठनों … Read more