‘अहिंसा’ का स्वर्णयुग भारत में…कल्पना
डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* चिंतन…. भारत में आज हिंदी की वकालत अंग्रेजी में की जाती है और वे अपनी संतानें अंग्रेजी भाषा में पारंगत कराते हैं। इसी प्रकार अहिंसा का गुणगान हिंसक स्वभाव के मानव करते हैं। आज भारत हिंसा प्रधान देश है, भले हम और हमारे वर्तमान प्रधानसेवक अहिंसा, शांति, सह-अस्तित्व आदि के विशेषणों की बात … Read more