दुनिया में आपका कौन ?

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)***************************************************** इस दुनिया में आपका अपना कौन है ?, यह सवाल अजीब लग रहा होगा। सभी लोग कहेंगे कि, मेरे माँ-बाप हैं, भाई-बहिन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं, अपना परिवार है, रिश्तेदार हैं, सभी मेरे अपने हैं। यदि आप ऐसा सोचते हैं तो आपकी यह सोच सौ प्रतिशत गलत … Read more

लोकतंत्र के हित में है नौकरशाहों का चुनाव लड़ना ?

ललित गर्गदिल्ली************************************** ५ राज्यों के विधानसभा एवं अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले अनेक प्रशासनिक अधिकारी राजनीति में आने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। इन प्रशासनिक अधिकारियों को नौकरशाही की तुलना में राजनीति इतनी लुभावनी क्यों लग रही है, क्यों राजनीति के प्रति इनमें आकर्षण बढ़ रहा है ? … Read more

धर्म का मर्म समझें

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** भक्ति, शक्ति और दिखावा… ‘आनंद लूट ले बंदे, तू प्रभु की बंदगी का,न जाने छूट जाए,कब साथ जिंदगी का।’आप सोच रहे होंगे कि, यह क्या ! लिखा हुआ है ‘धर्म का मर्म’ तो क्या धर्म का यही मर्म है कि, प्रभु की बंदगी करते रहो!प्रभु की बंदगी का मतलब यह नहीं है … Read more

मन के रावण को जला दें

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* युगों से विजयादशमी के दिन प्रभु राम द्वारा युद्ध में रावण का बध कर विजय पाने का त्योहार-उत्सव हर वर्ष मनाया जाता है। यह असत्य पर सत्य, अहंकार पर विनम्रता, निराशा में आशा, दुःख पर सुख, अंधकार पर प्रकाश की जीत, हर तरह से सुंदर सकारात्मकता की जीत का पर्व … Read more

मोबाइल और जिंदगी

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* आज के परिवेश में मोबाइल हमारे दैनंदिन जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, अगर साथ में मोबाइल नहीं रहा तो कई लोग परेशान हो जाते हैं। कुछ एक तो अवसाद के शिकार लगते हैं, क्या जादू कर गया है यह ५ इंच का खिलौना। दशहरे के त्योहार के अवसर … Read more

राजा ही लूटे, ये कैसी अर्थ नीति ?

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* चिंतन… वर्तमान में चुनावी कार्यकाल में सब दल दिल खोलकर जनता को प्रलोभन देकर चुनाव जीतना चाहते हैं। कोई न कोई दल सत्तारूढ़ होगा और उसके द्वारा इतनी अधिक सुविधाएँ देने की घोषणा जो बहुत अच्छा प्रयास है, पर जनता कितनी खुश और लाभप्रद होगी, यह नहीं मालूम है, लेकिन मध्यप्रदेश की जनता … Read more

भक्ति में दिखावा नहीं हो

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* शक्ति, भक्ति और दिखावा… भारतवर्ष में इन दिनों (१५ से लेकर २४ अक्टूबर) इस वर्ष (२०२३) का नवरात्र त्योहार चल रहा है। मान्यता है कि, इन ९ दिनों में प्रति दिन ‘दुर्गा माता’ के ९ रूप अवतरित होते हैं। इस तथ्य से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण कथा यह भी है कि, … Read more

अजन्मा बच्चा:अधिकार रक्षा का बड़ा मानवीय फैसला

ललित गर्गदिल्ली************************************** सर्वोच्च न्यायालय की चौखट पर कभी-कभी नैतिक एवं मानवीय मूल्यों से जुड़े मुद्दे भी विचाराधीन आते हैं, भारतीय न्यायालय की विशेषता रही है कि, वह ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए अनूठे फैसले लेकर मानवीय एवं नैतिक मूल्यों को मजबूती देता है। ऐसे ही एक मामले में अजन्मे बच्चे की नैतिकता के … Read more

समर्पित भक्ति-आराधना से ही शक्ति

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* शक्ति, भक्ति और दिखावा… वैदिक काल से ही ऋषि-मुनि कड़ी तपस्या, उपासना के साथ साथ पूरे भक्ति-भाव से विभिन्न देवी-देवताओं के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित हो उनसे समय-समय पर अपने को असुरों से बचाव हेतु शक्तियाँ प्राप्त करते थे, और उन शक्तियों को प्राप्त करने के पीछे किसी भी प्रकार … Read more

अपराध मुक्त समाज के लिए कानून-नैतिकता का महत्व बनाना होगा

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************* जब से मानव का उदय सृष्टि में हुआ, तबसे अपराध होना शुरू है। मानव में मन होने से वह अन्य जानवरों से श्रेष्ठ जानवर बन गया या माना जाने लगा। मन युक्त होने से उसमें विचारणा शक्ति आने से वह विवेक पूर्ण कृत्य करता है। यह जरुरी नहीं है कि, उसका हर कृत्य … Read more