राजस्थान में ‘राजस्थानी’ की राजनीति

राजस्थान में अंग्रेजी विद्यालय…. *डॉ. रामवृक्ष सिंह (महाप्रबंधक, सिडबी)◾राजस्थान में हिन्दी चल रही है। अब आजादी के पचहत्तर वर्ष व्यतीत कर लेने के बाद राजस्थानी को राज-काज में लागू करना एक प्रकार से पश्चगमन होगा। राजस्थान और ग्वालियर जैसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में हिन्दी सदियों से राज-काज में प्रयुक्त होती आई है। हम सब बहुत … Read more

प्लास्टिक है जहाँ, खतरा वहाँ

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** कोका कोला हर साल ३० लाख टन प्लास्टिक का इस्तेमाल करती है, यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। हर साल ५० हजार करोड़ पीईटी बोतल का उत्पादन होता है और कोका कोला बनती हैं १०,८०० करोड़ टन। ये आँकड़े चौंकाने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा पेप्सिको, एच एंड एम्, लोरियल, मार्क्स … Read more

भारत की प्राचीन जल संस्कृति को जीवंत करें

ललित गर्गदिल्ली************************************** जल प्रदूषण एवं पीने के स्वच्छ जल की निरन्तर घटती मात्रा को लेकर बड़े खतरे खड़े हैं। धरती पर जीवन के लिए जल सबसे जरूरी वस्तु है, जल है तो जीवन है। जल ही किसी भी प्रकार के जीवन और उसके अस्तित्व को संभव बनाता है। जीव मंडल में पारिस्थितिकी संतुलन को यह … Read more

अंग्रेजी को प्रश्रय और हिंदी पर वार, वाह राजस्थान सरकार!

रविदत्त गौड़***************************** कुछ दिनों पूर्व राजस्थान विधानसभा में सरकार के एक मंत्री ने बयान दिया कि, “राजस्थानी को राजभाषा बनाने के लिए कानून की तैयारी:मंत्री कल्ला बोले-२० साल से केंद्र में अटका प्रस्ताव!”इस प्रस्ताव पर वहां के पक्ष-विपक्ष दोनों सहमत हैं। अब सही मायने में देखा जाए तो राजस्थान में बहुत-सी बोलियाँ बोली जाती हैं। … Read more

संसदीय गतिरोध से बाधित होता राष्ट्र का विकास

ललित गर्गदिल्ली************************************** संसद की कार्रवाई को बाधित करना एवं संसदीय गतिरोध आम बात हो गई है। यही स्थिति संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में देखने को मिल रही है। इस सत्र को शुरू हुए ५ दिन बीत चुके हैं, लेकिन दोनों सदनों में हंगामे और नारेबाजी के अतिरिक्त और कुछ नहीं हुआ। सत्तापक्ष … Read more

मधुमेह में लाभकारी आम के पत्ते

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** आम को हमारे यहाँ फलों का राजा कहते हैं। आम के कई प्रकार होते हैं और हमारे यहाँ कई धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रम में आम के पत्ते की वंदनवार का उपयोग किया जाता है, जो शुभ मानते हैं, पर आजकल आम के पत्तों का उपयोग हम मधुमेह में कर सकते हैं। आम के पत्तों … Read more

एक औषधि है ‘सत्य’

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* भौतिकवादी युग में सत्य उतने तक ही लोकप्रिय है, जितनी सत्यता की आवश्यकता है। सत्य सकारात्मक मनोभावों का सहायक संचारी साधन है, लेकिन व्यावहारिक रूप में जीवन में सत्य की सीमाएं निश्चित तौर पर परिस्थितियों पर आश्रित हैं। सत्य शब्द से उद्धृत सत् वह है जो सदा शाश्वत है, ईश्वर रुप … Read more

चैत्र प्रतिपदा का स्वागत करना दायित्व

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)********************************************* हमारा नव वर्ष चैत्र प्रतिपदा बुधवार २२ मार्च को है। इस दिन का स्वागत करना हमारा धर्म व दायित्व दोनों ही है। इसलिए ध्यान रख कर तैयारी कर लें- घर के आँगन को रंग पोत कर साफ कर लेना है। आँगन में तुलसी का पौधा है तो ठीक अन्यथा अभी लगा … Read more

मनुष्य को कुछ ना कुछ तो करना ही होगा

ललित गर्गदिल्ली************************************** विश्व गौरैया दिवस (२० मार्च) विशेष… सुदूर अतीत से पिछले एक-दो दशक तक हमारे घर-आँगन में फुदकने वाली गौरैया आज विलुप्ति की कगार पर है। घरों को अपनी चीं-चीं से चहकाने वाली गौरैया अब दिखाई नहीं देती। इस छोटे आकार वाले खूबसूरत एवं शांतिपूर्ण पक्षी का कभी इंसान के घरों में बसेरा हुआ … Read more

अब मर्यादा नेता के आत्म-दर्पण से झांकती तक नहीं

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* राजनीति:उन्नति-भाग-२… स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद की राजनीति के रंग-ढंग पहले चुनाव के ५ साल के भीतर ही नजर आने लगे थे। चंद शिक्षित वर्ग के हाथों की कठपुतली बन राजनीति अहम में सवार होकर चलती रही। कौन पहले आकर बसा, कौन बाद में, प्रत्येक प्रदेश में कितनी जातियां व जनजातियां हैं, … Read more