विश्वगुरु बनने का सुन्दर प्रयास !

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वैसे हमारा देश लापरवाहियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कोई भी काम नियमानुसार होना, करना कठिन और असंभव है। हमारे यहाँ भाषण में बहुत-कुछ नैतिकता की बातें बोली और बताई जाती हैं, पर वास्तविक धरातल में सच्चाई अलग होती है। अमृत काल के समय यानी ७५ वर्ष स्वतंत्र हुए देश में और नैतिक … Read more

मुफ्त की बजाय गरीबों का आर्थिक स्वावलम्बन जरूरी

ललित गर्गदिल्ली************************************** आजादी के अमृत काल में सशक्त भारत एवं विकसित भारत को निर्मित करते हुए गरीबमुक्त भारत के संकल्प को भी आकार देना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं उनकी सरकार ने वर्ष २०४७ के आजादी के शताब्दी समारोह के लिए जो योजनाएं एवं लक्ष्य तय किए हैं, उनमें गरीबी उन्मूलन के लिए भी व्यापक … Read more

कांग्रेस क्या करे तो बचे ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* कांग्रेस पार्टी का वृहद अधिवेशन रायपुर में होने जा रहा है। इसमें २०२४ के आम चुनाव की रणनीति तय होगी। रणनीति का पहला बिंदु यही है कि कांग्रेस और बाकी सभी विरोधी दल एक होकर भाजपा का विरोध करें, जैसा कि १९६७ के आम चुनाव में डाॅ. राममनोहर लोहिया की पहल पर … Read more

मातृभाषा की आरती नहीं, इसे व्यवहार और वाणी में उतारें

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष… जब मैं मातृभाषा, स्वभाषा, राजभाषा या राष्ट्रभाषा की बात करता हूँ तो मेरे सामने भाषा नहीं देश होता है। किसी देश के साहित्य-संस्कृति, धर्म-आध्यात्म और सदियों से अर्जित ज्ञान-विज्ञान को बचाना या बढ़ाना है तो, सर्वप्रथम जरूरी है कि अपनी मातृभाषाओं और बोलियों आदि को आत्मसात करें। … Read more

हिंदी-शिक्षण की सुविधाओं से आवश्यक है उसकी आवश्यकता

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** किसी भी भाषा के प्रचार-प्रसार का प्रमुख साधन है भाषा-शिक्षण। भाषा-शिक्षण के लिए विभिन्न प्रकार की सुविधाओं की आवश्यकता होती है, लेकिन सबसे अधिक आवश्यक है उसकी माँग। माँग तभी होगी जब किसी प्रयोजन के लिए उसकी आवश्यकता होगी। यदि भाषा के शिक्षण -प्रशिक्षण की सभी सुविधाएं उपलब्ध हों या उपलब्ध … Read more

‘आयकर’ की जगह ‘जायकर’ क्यों नहीं ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* हमारे देश में आय कर फार्म भरने वालों की संख्या ७ करोड़ के आस-पास है, लेकिन उनमें से मुश्किल से ३ करोड़ लोग कर भरते हैं। क्या भारत-जैसे १४० करोड़ के देश में ढाई-तीन करोड़ लोग ही इस लायक हैं कि, सरकार उनसे कर वसूल सकती है ? क्या ये ढाई-तीन करोड़ … Read more

आप भगवान नहीं, हम बना देंगे!

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** हमारा देश धर्मभीरु और कष्ट प्रधान देश है। यहाँ तैतीस करोड़ देवी-देवता हैं तो हजारों की संख्या में भगवान् होना कोई नई बात नहीं है। भगवान् ऋषभ देव जी के समय में ३६३ मत थे। हमारे देश में ‘गीता’ में भी कहा गया है कि जब-जब दुःख, अन्याय, अत्याचार बढ़ता है, तब मैं … Read more

दाता और पाता, दोनों का अपमान

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************* सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवा-निवृत्त जज एस. अब्दुल नज़ीर को सरकार ने आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया है। इस नियुक्ति पर विपक्ष हंगामा कर रहा है। उसका कहना है कि जजों को फुसलाने का यह सबसे अच्छा तरीका है। पहले उनसे अपने पक्ष में फैसला करवाओ और फिर पुरस्कारस्वरूप उन्हें … Read more

संवादहीनता बड़ी घातक

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** पारिवारिक संबंध हों या सामाजिक या दूसरे देशों के साथ हों… संवादहीनता की स्थिति सदैव घातक होती है। आपस में संवाद होता रहना चाहिए। उससे शांति के प्रयासों में सफलता मिलती है और जहाँ संवादहीनता की स्थिति आ जाती है, वहाँ गलतफहमियाँ मन में जन्म लेती हैं। दूसरों के बारे में हम … Read more

जनतंत्र में मतदाता की अहम भूमिका

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** भारत एक गणतांत्रिक देश है। एक गणतांत्रिक देश में सबसे अहम होता है चुनाव और मत देना। गणतंत्र एक यज्ञ की तरह होता है, जिसमें मतों की आहूति बेहद अहम मानी जाती है। यहां एक मत भी सरकार और सत्ता बदलने के लिए काफी होता है। याद करिए वह समय, जब पूर्व प्रधानमंत्री … Read more