राखी का कर्ज़
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* रक्षाबंधन की सुबह थी। आँगन में तुलसी के पास दीपक जल रहा था। सिया ने थाली सजाई—रोली, अक्षत, दीप और वर्षों पुरानी वह राखी, जिसे उसने इस बार बहुत सँभालकर रखा था। उसका छोटा भाई मोहन शहर में दिहाड़ी मजदूरी करता था। पिता के निधन के बाद घर की … Read more