अमर रहे स्वाधीनता

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)…. अमर रहे स्वाधीनता, भारत अमर  तिरंग। संविधान भारत अमर, लोकतंत्र  सतरंग॥ नार्यशक्ति हो संबलित, युवाशक्ति  उत्थान। पर्यावरण हरितिम सुखद, भारतीय विज्ञान॥ हर्षित सुख वैभव कृषक, मानवता सम्मान।समरस बहु कौमी वतन, भारत चारु महान॥ आजादी की गूँज से, नया सबेरा  देश। बलिदानों के प्रति नमन, शान्ति … Read more

शहीद पूछ रहे हमसे…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)******************************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… आज़ादी हमने यूँ ही नई पाई है,इसके लिए लाखों शहीदों ने जान गवांई है। कोई जेल में बंद रहा किसी ने बाहर अलख जगाई,अनेक बलिदान हुए तब देश में आज़ादी आई। किसी ने बेटा खोया किसी ने पति खोया,किसी ने खोया भाई तभी है हमने आज़ादी पाई। किसी … Read more

ये कैसी आजादी

राधा गोयलनई दिल्ली************************************ कहने को तो आजाद हुए, पर मन से गुलामी गई नहीं,खान-पान और रहन-सहन, भाषा तक अपनी रही नहींआजादी उच्छृंखलता की, आजादी नारेबाजी की,आजादी है आन्दोलन की, आजादी चोरबाजारी कीआजादी गुण्डागर्दी की, आजादी आग लगाने की,आजादी एक-दूसरे को, नजरों से सिर्फ गिराने कीबेकार के इन सब कामों में, कितना ही समय बर्बाद किया,यदि … Read more

‘वन्दे मातरम्’ कहता जाऊँ…

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )************************************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… आओ बच्चों तुम्हें बताऊँ,हिन्दुस्तान की सैर कराऊँआजादी की गाथा सुनाऊँ,चलो तुम्हें लाल किला दिखाऊँ। भारत की राजधानी घुमाऊँ,नयी दिल्ली की शान दिखाऊँइंडिया गेट पर शीश झुकाऊँ,लाल किले पर तिरंगा लहराऊँ,राष्ट्रपति भवन-द्रौपदी मुर्मू जी का धाम दिखाऊँ। दिल्ली का कुतुब मीनार दिखाऊँ,शीशगंज गुरुद्वारे … Read more

हाँ! मैं भारत माता हूँ

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** ‘मैं भारत माता हूँ…’आर्यावर्त की जननी,इतिहास की गर्जनाकृष्ण की तर्जनी,रघुनंदन की तरिणीभव-भय तारिणी,‘मैं भारत माता हूँ!’ ‘मैं भारत माता हूँ…’हिमालय की चोटी हूँ,जम्बू-द्वीप में सोती हूँकश्मीर में रोती हूँ,पंजाब की खेती हूँकन्याकुमारी तक जागती हूँ,‘मैं भारत माता हूँ!’ ‘मैं भारत माता हूँ…’मेरी छाती में बहती निर्मल धारा,गंगा, यमुना, सरस्वती, … Read more

चलो चलें, झंडा फहराएंगे

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ******************************************** चलो चलें, झण्डा फहरायेंगे,  तिरंगा आसमां में लहरायेंगेगीत आज़ादी के हम गायेंगे,  चलो चलें, झण्डा फहरायेंगे। आजादी के गीत गायेंगे,  शहीदों को करके हम यादभाव-विभोर हो जाएंगे,  चलो चलें, झण्डा फहरायेंगे। अमीर-गरीब, ऊँच-नीच के भेद को, मिटाकर अब एक हो देशगान गायेंगेहिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई सब मिल, चलो चलें, झण्डा फहरायेंगे। नहीं होंगे अब भ्रमित जग … Read more

क्या नेता, क्या दफ़्तर!

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)**************************************** एक दिन हमारे एक परिचित घर आये,घूसख़ोरी के कई रोचक क़िस्से सुनायेक्या नेता ,क्या अफ़सर, क्या क्लर्क, क्या दफ़्तर!हर जगह घूस का बोलबाला हैदेश की नैतिकता का इसीलिए निकला दिवाला है। पास बैठी मैं भी सब बातें सुन रही थी,मन में उनकी नैतिकता के ताने-बाने बुन रही थीइस विषय पर अपना नज़रिया … Read more

माँ की लोरी में देशभक्ति

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************* एक छोटा-सा बच्चा माँ की गोदी में किलकारियाँ मार रहा,पर सोने का नाम नहीं ले रहारात बहुत हो गई, न सो रहा, न सोने दे रहा,चाँद की रोशनी को खिड़की से देख रहा। माँ ने कहा,-चलो तुमको एक लोरी सुनाती हूँ देशभक्ति की,सुनते-सुनते सोना, अब सुनो एक लोरीजिस देश में मेरा … Read more

विषपान किया था मीरा ने 

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)************************************ कृष्ण प्रेम में तल्लीन मीरा,दीन-दुनिया भुला बैठी मीराघर-बार उसने छोड़ दिया था,मीरा ने विषपान किया था। तुलसीदास ने भी गृह त्यागा,पत्नी रत्नावली के प्रेम मेंखिड़की से अजगर लटक रहा थारस्सी समझ ऊपर आ गए कमरे में,तब जाकर पत्नी ने फटकार लगाई। घनानंद की आँखों में बस गई सुजान,उसकी पूरी दुनिया बन गई … Read more

पृथ्वी और भ्रम

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)***************************************** पृथ्वी पर,सूर्यास्त होता ये भ्रमवर्षों से पाले हैं हम,पृथ्वी के झूले मेंहम सभी झूल रहे,घूम रहेऋतु चक्र का आनन्द लिए,घूमते जाने सेसूर्योदय-सूर्यास्त की राह,देश-विदेश मेंहोती अलग-अलग। पृथ्वी तो आज भी पृथ्वी,जो घूम रही ब्रह्मण्ड में पृथ्वी पर ही जग जीवित,पंचतत्व अधूरा। हे पृथ्वी माता,हमने वृक्षों के आभूषण से।तुम्हें सजाया,तुम्हें पूजा है॥ परिचय-संजय … Read more