वृतिका

कपिल कुमार जैन  भीलवाड़ा(राजस्थान) ***************************************************************** आज शाम को द्वार पे विदा कर के, ज्यों ही रात्रि के आरम्भ में मैं चांद के आगोश में समाया, थकान से बोझिल पलकों ने मुझे मेरी ‘वृतिका’ से मिलवाया, ख़्वाब में आई एक मूरत कुछ जानी कुछ अनजानी-सी, कुछ सकुचाई फिर धीरे से मुस्कुराई, आप कौन ? इस सवाल … Read more

करता जा सतकर्म तू

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** करता जा सतकर्म तू,बाधा दे बिसराय। बाद अँधेरी रात के,भोर किरन मुस्कायll रोकेंगी तेरी डगर,दुश्वारियाँ हजार। ध्यान लगा तू लक्ष्य पर,बाधा देहि बिसारll माटी की काया बनी,माटी में मिल जाय। लोभ-मोह के फेर में,जीवन दिया गँवायll मर्यादा से है नहीं,धन संपत्ति महानl दौलत कर का मैल है,कहि कर गए सुजानll … Read more

अंधेरा क्यूँ है

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** किया है रौशनी फिर भी,अंधेरा क्यूँ है। घिरा है मन उदासियों से,परेशां क्यूँ है। किया है… जो गुज़र गया है,उसे भूलाने की आदत है, फिर भी सुबह का,सबेरा सोया क्यूँ है। किया है रौशनी… आँखों के आंसू,कभी सूखे ही नहीं, फिर इतना गहरा कोहरा क्यूँ है। किया है रौशनी… सब कुछ … Read more

अपनी धुन

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** कोई मैं तो अपनी ही धुन करना दुनिया से क्या ? भक्ति रस लागी लगन करना दुनिया से क्या ? मेरी भक्ति का एतबार कर लो, तुम भी संगीत से प्यार कर लो बढ़ा सरगम में है दम, करना दुनिया से है क्या ? मेरी भक्ति का एतबार कर … Read more

क्यों करता हूँ कागज काले…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** क्यों करता हूँ कागज काले ? बैठा एक दिन सोच कर यूँ ही, शब्दों को बस पकड़े और उछाले। आसमान यह कितना विस्तृत, क्या इस पर लिख पाऊंगा! जर्रा हूँ मैं इस माटी का, माटी में मिल जाऊंगा। फिर भी जाने कहां-कहां से, कौंध उतर-सी आती है। … Read more

ख़्वाहिश

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** नजरों ने ही देखा हँसी ख़्वाब तेरा, चाहतों की कशमकश में मुस्कुराता चेहरा तेरा। जवाँ दौर में, तेरी मोहब्बत की हर हसरत का, लम्हा-लम्हा गुजरा, जवाँ दिल की धड़कन के ख़्वाब-ए-ख़्वाब रह गये, हकीकत में ज़िन्दगी कि यादों आफताब तेरा। छुप-छुपकर, तन्हाई में मुलाक़ात की आरजू, ज़िन्दगी की हँसी … Read more

मन

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* मन की गति विचित्र, कोई ना मन का मित्र मन है बड़ा चपल, इसे तो संभालिये॥ मन है सबका राजा, रहता है सदा ताजा नही ये किसी के वश, इसे समझाइए॥ करे जो मन को वश, होता न वो परवश पाता है विजय वही, इसे वश कीजिए॥ मन ही करता … Read more

फूल खिलाएं दीप जलाएं

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** पुण्य धरा की पावन माटी,आओ हम सम्मान करें, कंचन जैसे संस्कार पर,आओ हम अभिमान करें। मात-पिता के श्रीचरणों पर,श्रृद्धा सुमन चढ़ाओ तो, श्रीगुरुवर के उपकारों पर,अपना नेह जताओ तो। नेह स्नेह के भावों को यूँ,मन में आज सजाएं, दीन-दु:खी की सेवा के हम, ‘फूल खिलाएं दीप जलाएं॥’ आतंकवाद पर कहो … Read more

दिल से जो प्यार करते हैं…

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ दिल के झरोखों से, सब कुछ दिखता है। तभी तो दिल हमारा, एकदम साफ रहता है। तभी तो प्यार के लिए, दिल मेरा उमड़ता हैll दूर होकर भी आप मेरे, बहुत करीब जो रहते हो। लगती है चोट तुमको, दर्द हमें महसूस होता है। क्या इसे ही दो दिलों का, लोग … Read more

प्रार्थना

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** हमको चरणों में लगा दो, हे माँ तेरी शरण आये। खुशी के तुम दीप जला दो, श्रद्धा के हम फूल लाये। हम बालक तेरे पुजारी, करें हम तन-मन से वन्दन। अम्बर से ज्ञान बरसा दो, सबका महक जाए जीवन। जीवन में रौशनी भर दो, दे दो प्यार का तुम सागर। प्रकाश … Read more