माँ…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’ पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड) ****************************************************************************** माँ पर लिखने में सागर-सी, हो मसि भी कम पड़ जायेगी। एक नहीं सौ-सौ जीवन भी, यह ममता क्या लिख पायेगीll जिस माँ के चरणों में सारे, सुर निशिदिन शीश झुकाते हैं। जिस माँ के आँचल की महिमा, ऋषि-मुनिजन भी नित गाते हैंll माँ के उपकारों का वर्णन, रसना भी … Read more

मतदान-अधिकार

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* भारत के संविधान में,दिए मूल अधिकार। मानवता हक में रहे,लोकतन्त्र सरकार। लोकतंत्र सरकार,लोक से निर्मित होती। भूलो मत कर्तव्य,कर्म ही सच्चे मोती। कहे लाल कविराय,अकर्मी पाते गारत। मिला वोट अधिकार,बनाओ अपना भारत। दाता ने हमको दिया,जीवन का अधिकार। जागरूक मतदान से,लोकतंत्र साकार। लोकतंत्र साकार,समझ अब मत की कीमत। सोच-समझ मतदान दिखाओ … Read more

प्रेम फुहार

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** मगन हो प्रेम रंग, सब पर लुटाइये, बैर भाव मन से तो, सदा ही मिटाइये। माँ प्रेम ममता भरी, दिल से अपनाइए, पिता से अनुशासन, नित सीख जाइए। भाई प्रेम रक्षा करे, बहनों से प्रीत मिले, स्त्री,पुरुष प्रेम में भी, समर्पण चाहिए। प्रेम रस जीवन में, उमंग भरे जानिये, बिना प्रेम … Read more

सिसकता किसान

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** गर्मी की इस मार में,रोते आज किसान। बिलख रहे हैं भूख में,धरती के भगवानll देखो हाहाकार है,सिसक रहे हैं लोग। धरती सूखी खेत है,घेर रहे हैं रोगll तपती धूप बढ़े यहाँ,कौन करे अब काम। खेतों में दर्रा फटे,बंजर हुए तमामll जीने को मजबूर है,सिसक रहे हैं आज। कर्ज … Read more

तुम किस्मत आजमाना,मैं संघर्ष करुँगा

दीपेश पालीवाल ‘गूगल’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************** लाख आए चाहे तूफान कोई जीवन में अब मैं नहीं रुकूँगा, चुनौतियाँ हजार मिलें चाहें मुझे मैं सब स्वीकार करूँगा। तुम किस्मत आजमाना,मैं संघर्ष करूँगा…॥ तुम चाहे जेक-चेक हजार लगाना, या चाहे किसी मंत्री से बात करवाना। अबके मैं बिल्कुल नहीं रुकूंगा, तुम किस्मत आजमाना,मैं संघर्ष करूँगा…॥ डर के … Read more

खरी-खरी

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** जिन्हें वतन के आदर्शों का,दर्प दिखाना था जन को, सत्य और सुचिता के पथ पर,जिन्हें चलाना था मन को। जिन कंधों को संस्कार का,भार उठाया जाना था, जिनको अपनी नीति नियत का,प्रहरी हमने माना था। भले-बुरे का भेद बताकर,सत्य उगलना था जिनको, नेह स्नेह के हिम शिखरों-सा,नित्य पिघलना था जिनको। … Read more

पोरस

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* जो जीता वही सिकन्दर इस मिथ्या को कब तक तुम गाओगे, पोरस की विजयगीत को इतिहास के पन्नों में कब तक यूँ छिपाओगे। सिन्धु नदी और झेलम ने फिर पोरस को पुकारा है, उन इतिहासकारों की चाटुकारिकता को देखो कितना धिक्कारा है। मुद्राराक्षस के पन्नों को कभी तुम टटोल लो, … Read more

मतलबी राग

शिवम द्विवेदी ‘शिवाय’  इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** किसका गीत सुनाऊँ,सब मतलबी राग हैं, भीतर से दगाबाज़ बाहर फिर भी सजाये साज हैं। आदमी संभलता तब,जब वक्त की लगती ठोकर है, जो करता बातें सच्ची,सच्ची राह बताता ये दुनिया उसे समझती जोकर है। ये ज़माना किसी का नहीं,न ही इस पे हक़ किसी का, यहाँ कुछ भी … Read more

अपने

मानकदास मानिकपुरी ‘ मानक छत्तीसगढ़िया’  महासमुंद(छत्तीसगढ़)  *********************************************************************** निज भाषा,निज धर्म को समझो, गुरु भी यही सिखाते हैं। गैरों के आचरण भी कभी-कभी, खुद को नीचा दिखाते हैंll जो अपने को छोड़,गैरों के हो जाते हैं, ना ओ गैरों के होते है ना अपने रह पाते हैं। कटता है जीवन कष्ट और तिरस्कार में, न इधर … Read more

जीवन

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’ मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* धीरे-धीरे गुजर रहा था जीवन, फूलों-सा महक रहा था जीवन हँसता-खिलखिलाता-सा था जीवन, जितना था उसी में था खुश जीवनl अपने में मिसरी-सा घुला था जीवन, स्वच्छन्द और छोटी उड़ानों वाला था जीवन, निर्भीक और उत्साहित था जीवन संगीतमय लग रहा था ये जीवनl भक्ति आराधना में भी था … Read more