खुद बन अपना रखवाला

श्रीकृष्ण शुक्ल मुरादाबाद(उत्तरप्रदेश)  ***************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… वृक्ष काट कर इस धरती को, तूने बंजर कर डाला। भूजल का अतिशय दोहन कर, रिक्त किया जल का प्याला॥ सूर्य ताप अब सह ना पाए, मरुथल-सी बनती जाती। पूछ रही मानव से धरती, ये तूने क्या कर डाला॥ अपने ही जीवन को तूने, कैसे संकट … Read more

इस धरा को स्वर्ग बनाएंगे

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… हम छोटे-छोटे प्यारे बच्चे, कोमल टहन से सीधे सच्चे। नित आगे बढ़ते रहना है, दुःख-दर्द सभी के सहना है। मुझे चाहिए है मार्गदर्शन, और न कुछ भी कहना है। छोटी-छोटी पेड़ों की टहनी, सहयोग से ही बढ़ पाती है। आश्रय मिलता जब श्रेष्ठ का, एक … Read more

पुण्य भूमि मेरी धरा

सुषमा दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मेरे देश की सीमाएं रहें महफूज चारों ओर से, हर एक दुआ में समाई है यही शुभ भावना दिग-दिगंत तक कीर्ति गाथा के मधुर स्वर, देश मेरा हो अमर बस है यही मनोकामना। मिट्टी का कण-कण बने स्वर्ण रजत-सा, जर्रा-जर्रा महके मेरी मातृभूमि का जैसे चंदन … Read more

धरा रहे सदा यशस्वी.

प्रेरणा सेन्द्रे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… शुद्ध वायु,शुद्ध वातावरण, चारों ओर हरा-भरा। समेट कर अनेक तत्वों को, उपजाऊ बनाती धरा॥ मातृत्व का भाव और प्यार, सिर्फ देना है जिसका स्वभाव। हर मौसम में जो कष्ट सहे, सूखे बंजरता के जो सहे घाव॥ बारिश का इंतज़ार, जो बाँहें फैला कर करती है। और … Read more

पेड़ बचाना धर्म हमारा

अमिताभ प्रियदर्शी रांची (झारखंड) ***************************************************************** लें संकल्प सभी यह प्यारा, पेड़ लगााना धर्म हमारा। सींंच हमेशा नेह नीर से, उसे बचाना कर्म हमारा। होंगे पेड़,धरा तब होगी, तभी यहाँ फसल उपजेगी। चारों ओर होगी हरियाली, और सर-सर हवा चलेगी। स्वच्छ वायु में साँस हम लेंगे। हर्षित हो कर सभी कहेंगे, पेड़ लगाना धर्म हमारा, उसे … Read more

स्वार्थ छोड़ दे मानव

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* स्वार्थ छोड़ दे मानव,वरना मिट जाएगा तू, फिक्र कर जरा धरा की,वरना रोएगा तू। बर्बाद मत कर पेड़,पौधे,पर्यावरण यूँ, अपने प्राण मत और खतरे में डाल तू। जिससे सब-कुछ मिलता,मत कर उसे बंजर यूँ, ये सब मिटा तो,बदले में छाँव कहाँ से लाएगा तू। स्वार्थ की खातिर मत बन अंधा,कर … Read more

हमारी वसुंधरा

वन्दना पुणताम्बेकर इंदौर (मध्यप्रदेश) ******************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… सम्मान करो,तुम वसुंधरा का, जिसने हमको जीवनदान दिया है। मत भूलो तुम उसके ऋण को जिसने वायु-प्राण दिया है, सम्मान करो…॥ जल रही अंगारों से वसुधा, अब इसे बचाना है, अपनी सुन्दर वसुंधरा को। फिर से हरा बनाना है, सम्मान करो…॥ इसी पावन वसुंधरा पर, … Read more

धरती से है इंसान

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… धरती अपनी धारिणी,माता रूप समान। करो वन्दना प्रेम से,इनसे हैं इंसान॥ इनमें हैं सारा जहां,सारा हिंदुस्तान। तिलक लगा माथा इसे,चन्दन बने महान॥ माता मेरी ये धरा,हरियाली चहुँओर। सूरज करते भोर हैं,पक्षी करते शोर॥ वीरों की क़ुर्बानियाँ,इसी धरा की शान। भारत के बेटा सभी,करते … Read more

बेजान पत्थर

मनोज कुमार सामरिया ‘मनु’ जयपुर(राजस्थान) *************************************** ना मन्दिरों में महफूज है, ना मस्जिदों में सलामत है। कलियों के खिलने पर अब, बागों-बगीचों में भी बगावत है। अब तलक यकीं था कि, बसता है तू कहीं पत्थर की मूरत में तू रहनुमाँ है कहीं कुरान की सूरत में… पर भोला था मैं जो, यकीं कर बैठा … Read more

सुहाना पागलपन

मदन मोहन शर्मा ‘सजल’  कोटा(राजस्थान) **************************************************************** वह निहारती है तो मैं नजरें झुका लेता हूँ, वह हया के परदे में सिमट जाती है जब मैं उसे एकटक देखता हूँ, शबनम-सी लरजती अंतर्मन से प्रस्फुटित होती, भावनाओं का कोमल स्पर्श मदहोश करती अभिलाषा, आँखों से नूर बनकर टप-टप टपकती है, पर खामोश। थरथराते हैं होंठ करने लगता … Read more