विश्व के तात-मात शिव शक्ति

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’जमशेदपुर (झारखण्ड)******************************************* महाशिवरात्रि विशेष… गाइए महेश नित्य, विश्व के हैं तात-मात,शीश चंद्र गंगा धारा, ध्यान से पुकारिए। कैलाश निवास करें, प्रभु जन ताप हरें,कंठ में भुजंग हार, उर में बसाइए। दीनन त्रिशूल ढाल, दनुजन महाकाल,मेटते कुअंक भाल, इसे ना भुलाइए। महाशिवरात्रि आज, दूल्हा बने हैं नाथ,आओ गीत गाओ आज, बारात सजाइए। भस्म … Read more

बेबसी-कसक

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* रह-रह कर उठती-गिरती,फिर अंग-अंग चुभ जाती हैबेबसी के द्वार पर ठहरी,कसक जब जाग जाती है। मसोस कर दिल को मेरे,पलकों से बह जाती हैदर्द की बेदर्द बिजलियाँमन रीता कर जाती है। कोरे पन्ने-सी आकर मेरी,हथेली पर छप जाती हैदिल की सुंदर दुनिया से,मुझे जुदा कर देती है। आह भी न निकल … Read more

यही मेरी हस्ती

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** किताबों की बस्ती है, यही मेरी हस्ती है,हर इक सफ़र में यहाँ दिल की बस्ती है। बहुत कुछ हकीकत वहीं कुछ फ़साना है,हर सतर में इक याद-सी महकती है। पन्नों पे सजी हैं वो ख़्वाबों सी तहरीरें,जो दिल के वीराने में चुपचाप हँसती है। पढ़े हैं यहाँ मैंने कई ग़म … Read more

अजनबी संग न जाना

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************* एक थी प्यारी नन्हीं लड़की,नाम भी सुंदर था ‘सोनझरी’लाड़ली थी मम्मी-पापा की,वह लगती आँख से नीलपरी। बाल थे उसके बडे विचित्र,रेशमी सुनहरी लम्बे घनेभूमि छू के सोना बन जाती,ऐसे थे करिश्मा केश घने। चोरों को बात जब पता चली,घर बाहर से चुरा ले गएटाॅफी लालच सोनझरी को,मुंडन किए बाल उतार लिए। इतने … Read more

क्यों ?

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** क्यों डराते हो अँधेरे को अँधेरे के लिए,उन्हें पता ये है चिराग़ रोशनी के लिए। नहीं रुकता है सुनो काम किसी के लिए,चलते रहना ही है ज़रूरी ज़िंदगी के लिए। गुज़र गया अगर समय यही बताने में,नहीं किया है कोई काम इस जमाने में। शिकवा फिर बाद में करने से कुछ नहीं … Read more

था बड़ा खास

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** आम-सा था वो,पर था बड़ा खास…उससे मिलना हुआ ऐसे,सावन बरसे अचानक जैसे…। उसकी सादगी, अपनापन,भूलता नहीं आज भी मन…ऐसे ही ताड़ते रहे उसे,कोई अपना हो जैसे। सितारा था, पर जमीं नहीं छोड़ी,अकस्मात चला गया वो…उसका जाना जैसे कोई रहस्य है,ज़िंदगी ने फिर मिलाया ही नहीं है। आज भी है वो मेरी … Read more

अनुपम-अदभुत चित्रकार

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अनुपम अद्भुत चित्रकार जो, ब्रह्माण्ड जगत निर्माता है,शैलेन्द्र नदियों से सज्जित, सागर लहरें रच जाता है।लरज़ हरि लीला दुनिया, काल त्रिविध शक्ति दिखलाते-हरियाली सुष्मित सुरभित भुवि, प्रकृति चारु रूप सुहाता है। सप्तर्षि सुशोभित नभमण्डल नीलांचल वसन सुहाता है,सतरंगी मानव जीवन जग, इन्द्रधनुष गगन इठलाता है।कुसुमाकर अरुणिम प्रभात चहुँ कानन … Read more

सुबह के इंतजार में…

कमलेश वर्मा ‘कोमल’अलवर (राजस्थान)************************************* यूँ ही गुजर जाती है रात,सुबह होने के इंतजार मेंपता ही न चलता बीत जाती है रात,अक्सर सुबह होने के इंतजार में। उलझनें बहुत है ज़िंदगी में,सुलझाना बड़ा ही मुश्किल हैकाँटों से गुजरना पड़ता है,यही तो जीवन की बंदगी है। बस खुद में ही खोये रहना,बस यूँ ही करवटें बदलनागुजर जाती … Read more

कैसे लाज बचेगी ?

डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** परिभाषा देखो बदल रही,अब तो अपने समाज कीकैसे लाज बचेगी सोंचो!अपने घर और परिवार की। पढ़े-लिखे आगे बढ़ें बेटियाँ,इसमें तो कोई बुराई नहींआजादी अच्छी है लेकिन,उच्श्रृंखलता अच्छी बात नहीं। बांध दुपट्टा मुखड़े पर वो,कॉलेज कहकर जाती हैकहीं बदलती जीन्स-टॉप,फिर होटल में देखी जाती है। मोबाइल से प्यार है होता,फिर होती इकरार की … Read more

बहे प्रेम गंगा

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** ‘विश्व शांति और समझ दिवस’ (२३ फरवरी) विशेष…. ‘समझ’,विश्व मेंजले शांति दीप,उमंग रहे,अनुराग। ‘शांति’,निरंतर रहेप्रेम गंगा बहे,मिटे नफरतअँधेरा। ‘समझ’,प्रेम, अहिंसादया की किरण,दिशा लहराए।सत्य। ‘शांति’,सत्य गूँजेफैले भली रौशनी,करूणा मनशीतलता। ‘समझ’,बैर बुझेकोई न दुश्मन,प्रेम, समर्पणगहराए। ‘शांति’,रंग-भेदऔर मिटे जाति,सम्मान मिले,समता। ‘समझ’,प्रेम उमड़ेजीना समान मिले,सीमाएँ टूटें,न्याय। ‘शांति’सबका साथदिलों में समता,चमके ममताविश्वास। ‘समझ’साथ निभाएंस्नेह पुल बनाएं,सुख-दु:खसम्बल। … Read more