छतरी की मूक लडा़ई
आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गर्मी तो थी आफत लाई,हमने भी छतरी लहराईदेख के मौसम की गहराई,बच्चों जैसी छतरी आई। कड़ी धूप, सूरज गरमाया,खोली छतरी पाया छायाकुछ माह में मौसम बदलाया,बारिश, आंधी, तूफां लाया। हाथ में छतरी, शौक जगाया,कभी धूप, कहीं बारिश आईबाढ़ ग्रस्त कीचड़, सड़क की काया,रह-रह कर बस बारिश थी आई। तब-तब … Read more