पुष्प वाटिका

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** लछिमन के संग श्री राम पहुँचे,थी जहाँ पर वाटिकासंग स्थित के पहुँचीं सिया भी,गौरी पूजन को वहाँ। नूपुर की ध्वनि सुन मधुर,छिप गये शीघ्र लतिका बीच वेसौंदर्य देखा रूप का,भाई के पीछे हो खड़े। जब नयन दोनों के मिले,एकटक रहे वे देखतेसुध-बुध वे भूले आये थे हम,फूल लेने के लिए। फिर चुन … Read more

साल बदल गया

बबीता प्रजापति झाँसी (उत्तरप्रदेश)****************************************** नया सवेरा, नयी आशाएं, नए संकल्प… तारीख बदल गई,साल बदल गयावक़्त भी क्या,कमाल गुज़र गया। शुक्रिया रब का,कई नेमतें अता कीमुश्किलातों का दौर भी,फिलहाल बदल गया। नई आशाएं साथ होंगी,नई उम्मीदें साथ होंगीगुजरे वक़्त से कह दो जाकर,मेरे अब दिल का हाल बदल गया। खुशियाँ आएं स्वागत है उनका,गमों का सूरत-ए-हाल बदल … Read more

बिटिया रानी

डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** बिटिया रानी बड़ी सयानी,आँखों में क्यों उसके पानी। पापा की ये राज दुलारी,क्यों रोती है बिटिया प्यारी। अच्छे कपड़े, चप्पल अच्छी,तू कितनी प्यारी-सी बच्ची। नानी के घर बस चलना है,नहीं उसे कुछ सुनना है l मांगें पूरी जब होना है,रोना बंद तभी होना है। हीरे-मोती की लड़ियों जैसी,बेटी होती है … Read more

भोले करना कृपा

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)****************************************************** श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… हे गौरी के लाल श्री, बुद्धि विनायक आप।मातु-पिता शंकर शिवा, दूर करो सन्ताप॥ दूर करो सन्ताप अब, सहा न जाये भार।हे भोले करना कृपा, मन से मिटे विकार॥ मन से मिटे विकार सब, सरल रहे व्यवहार।हे भोले करना कृपा, बहे प्रेम की धार॥ बहे प्रेम की धार … Read more

प्रथम भोर, नये एहसास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* प्रथम भोर नव वर्ष में, नव पौरुष एहसास।रीति-नीति सम्प्रीति रस, भर दे हृदय मिठास॥ नया सबेरा अरुणिमा, खिलत चहुँ सतरंग।सत्प्रेरक सद्मार्ग में, रग-रग भरे उमंग॥ हरितिम हो सारी प्रकृति, सरिता सलिल प्रवाह।निर्मल हो पर्यावरण, सुगम लक्ष्य हो राह॥ प्राण वायु निर्मल बहे, खिले वृक्ष फलदार।महकें कलियाँ खिल कुसुम, चहुँ … Read more

मैं स्त्री हूँ…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ मैं स्त्री हूँ,जग की जननी हूँसृष्टिकर्ता हूँ,परंतु विडम्बना देखो…अपनी ही रचना,‘पुरुषों’ के हाथोंसदा से छली जाती रही हूँ,मेरी अस्मिता से खेलता हैरौंदता है… मसलता है…,अस्तित्व को नकार करउस पर बलपूर्वक राज करना चाहता है। मैं स्त्री हूँ,जन्मते ही दोयम्बन जाती हूँ‘बेटी पैदा हुई’…,सुनते ही सबके चेहरे पर तनाव…माथे पर शिकन पड़ जाती … Read more

नवीन सृजन करो

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** त्याग कर व्यग्रता को अब तुम,मनन करना शुरु करोकठिन परीक्षा अभी बहुत है,मन को तुम धीर करो,खोल कर ईक्षण को अपने,आप का दर्शन करोदिए थे जो स्व को वचन तुम,वचन का स्मरण करो। छोड़कर आलस्य को अब तुम,चित्त से निश्चय करोसाधोगे लक्ष्य को असंशय,अविरत स्वधर्म करो,ज्ञान और विज्ञान से अब तुम,नव्य … Read more

हँसते-हँसते दुनिया छोड़ चले

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** हँसते-हँसते ये दुनिया छोड़ चले,अपना भी सब कुछ वे छोड़ चलेरिश्ते-नाते, इत्र-मित्र भी छोड़ चले,दिल की बातें, अपनी यादें छोड़ गए। गहरे रिश्ते, प्यारी बातें सब जोड़ गए,जिद न थी, फिर भी सब यूँ ही तोड़ गएजीवन के बंधन सारे के सारे मोड़ गए,बच्चों-बीबी का साथ क्यों छोड़ गए ? … Read more

ऐसा हिंदुस्तान बनाएं

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* नया सवेरा, नई आशाएं, नए संकल्प… नए साल के संकल्पों से,आशाओं के सृजन रचाएंमन में स्वाभिमान जगाएं,सद्भावों के दीप जलाएं। एक नई शुरूआत करें हम,शांति का लहराए परचमअलौकिक मुस्कान लिए,चाँद-सूर्य शांति बिखराएं।सद्भावों के दीप जलाएं… मधुर तराने हों गीतों के,जीवन महके फूलों जैसेवीणा की मधुरिम तानों से,अंधकार को दूर हटाएं।सद्भावों के दीप … Read more

‘मुफ्तखोरी’ दीमक

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘मुफ्तखोरी’,बड़ी घातककैसे बढ़ेगा देश ?रोको बंटाधारसमझो। ‘मुफ्तखोरी’,बनाती नाकाराभविष्य का दीमक,लीलती पुरुषार्थपतन। ‘मुफ्तखोरी’,आदत बुरीईमानदारी को मिटाती,राष्ट्र विकासथमता। ‘मुफ्तखोरी’,राष्ट्रीय रोगकरती बुद्धि कमजोर,आराम भलापिछड़ापन। ‘मुफ्तखोरी’,होगा बचनाअंतर मिटाना जरूरी,लाचार मनुजबर्बादी। ‘मुफ्तखोरी’,कर्म भुलातीसफलता खत्म होती,भूलता मेहनतशिखर। ‘मुफ्तखोरी’,सीधा लालचसत्ता अपनी सोचती,देश रसातलअभिशाप। ‘मुफ्तखोरी’,शोषण करतीआपसी प्रेम मिटता,दुर्भावना बढ़तीनासूर। ‘मुफ्तखोरी’,अजीब सुविधादूर का नुकसान,अंधी सरकारचिंतन। ‘मुफ्तखोरी’,नेता बरगलातेकरदाता का अपमान,क्षुद्र स्वार्थरेवड़ी। ‘मुफ्तखोरी’जनसेवा … Read more