क्या पाया, क्या खोया!
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** उसको खोकर तो मेरे पास रहा कुछ भी नहीं।ये जिंदगी तुम्हीं से है, ऐसा तो कहा कुछ भी नहीं। भँवरे व तितलियाँ ही अलामत हैं प्यार के,इसके अलावा इजहार-ए-इश्क बचा कुछ भी नहीं। जज्बातों के भँवर में गवांया है दिल का चैन,खोकर सुकून-चैन सहा कुछ भी नहीं। बारिश का है … Read more