दीए बेचते देखा है
ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*************************************** जगमग जीवन ज्योति (दीपावली विशेष)… शहर के एक नुक्कड़ पर,एक औरत को दीए बेचते देखा हैतन पर लिपटे कपड़ों के बीच,एक बच्चे को सिसकते देखा है। मिट्टी के पके दीयों की तरह,उसका भी पका चेहरा देखा हैकैसे होगा जीवन का गुजारा!आँख से आँसू बहते देखा है। तपतपाती धूप में उसको,ग्राहकों के आगे … Read more