अनिर्वचनीय शिव
प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************* हे! महादेव महेश्वर, हे! सर्वेश्वर त्रिनेत्रधर गौरीवरहे! वृषभेश्वर पिनाकधर गौरीवर। श्राप दियो शिव कश्यप ऋषि ने, मारोगे तुम पुत्र स्वयं काभक्तन हित स्वीकारा श्राप भी, हे! करुणेश्वर त्रिशूलधर गौरीवर। कालकूट विष पीकर शिव ने, औषधि में बस भंग जो पी लीजग पिए मस्ती दोष धरे शिव, हे! विश्वेश्वर डमरूधर गौरीवर। पाप करन से डरे … Read more