मैं स्कूल हूँ

नागेन्द्र सिंह सोमवंशी सतना(मध्यप्रदेश) *********************************************************** आई जुलाई सज गई बगिया नन्हें-नन्हें फूलों से, झूम उठा कोना-कोना खिलखिलाती कलियों सेl चहक उठा शाला का आँगन नन्हें-नन्हें कदमों से, स्कूल बसें जब सज आई मनमोहित देव अंशों सेl रंग-बिरंगे कपड़ों वाली गुड़िया आई पहने यूनिफार्म, टाई जूती सर पे हेअर बैंड गले में लटकाए वाटर टैंकl हृदय … Read more

काँवर का पावर

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** देखो सुहाना सावन आया है, यह सबके मन को भाया है। कैलाश से भोले चले देवघर, यही है काँवर का पावर। बम बम बोलते चले काँवरिया, रिमझिम बरसे श्याम बदरिया बिना थके सब बढ़ते जाते डगर, यही है काँवर का पावर। सावन माह में शिव अवघड़ दानी, हर लेते भक्तों … Read more

किस्मत

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** हाय री किस्मत ढूँढते हुए, पागल हो गया मैं,पता दे। कहां रहती,कैसी दिखती, जरा हमको भी बता दे। लोग कहते तू मिल जाए, तो जिंदगी संवर जाती है। दूर खड़ी हँस रही मुझ पर, पास मेरे क्यों नहीं आती है। नहीं मिलती हर किसी से, पर हर दिल में … Read more

यादों का महीना

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मधुर मिलन का है महीना, कहते जिसे सावन का महीना। प्रीत प्यार का है महीना, कहते जिसे सावन का महीना। नई-नवेली दुल्हन को, प्रीत बढ़ाता ये महीना॥ ख्वाबों में डूबी रहती है, दिन-रात सताती याद उन्हें। होती रिमझिम वारिश जब भी, दिल में उठती तरंग अनेक। पिया मिलन को तरस रही … Read more

वन्दना

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** हमें प्रगति के नये-नये मार्ग दिखाना, न विचलें हम,हमें चलना सिखाना। मानवता न रोए बिलख कर कभी, हे सरस्वती माँ हमको हमीं से मिलाना॥ जीवन के उपवन में न भँवरों का घात हो, न कभी समाज में अंधविश्वास की बात हो। सदैव सुरक्षित रहें मानवता के नीड़ यहां, न हो दु:ख … Read more

माँ

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** माँ नहीं होती संसार नही होता, पर्वत से भी ऊंचा चाँद नहीं होता। सूरज की किरणों में प्रकाश नहीं होता, आसमान से पानी की बरसात नहीं होती। न कहीं राम होता न कहीं श्याम होता, हर जगह सुनसान ही सुनसान होता। समुंदर की लहरें आसमान को छूती, धरती का पता नहीं … Read more

परदेशी सैयां

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* सैयां जी……..ओ सैयां जी, याद आए तेरी बतियां,बीती रतियां। कहती हैं सखियाँ,जोगन बनी क्यूँ, प्रेम दिवानी,आँखों में तेरी कैसा है पानी। होंठों की लाली हाय! किसने चुराई, हाथों की मेहंदी ऐसे फ़ीकी पड़ी क्यूँ। क्या मैं कहूँ जी बोलो न! ओ सैयां जी॥ मिलो जो मुझसे,कह दूँ तुमसे, ख़्वाबों में … Read more

सबके जैसा

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** न मिलेगा यहाँ तुझे कोई तेरे जैसा, तू यहाँ खुद ही बन के देख ले सबके जैसा। बैठा है आसमां पे वो सबका रखवाला, माँग ले उससे दुआ बनने की सबके जैसा। बैठा है आसमां पे सबकी दुआ सुनने को, तेरी दुआ पहुंचे वहाँ तो तू बने सबके … Read more

गगन घन बरसन…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ******************************************************************  (रचना शिल्प:इस पद्य में ‘अ’ के अलावा कहीं भी ‘अन्य स्वर की मात्रा’ का उपयोग नहीं किया गया है।) गगन घन बरसन। मगन मन हरषन। जलद भर उमड़न। धमक घर बरतन। पड़त जल छम छम। बजत डम डम डम। चमक नभ चमकन। सबन मन डरपन। पवन जब … Read more

चाहत

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** हम तो वैसे ही हैं जैसे तब थे, जब धरती पर वो सेब नहीं हम तुम ही थे। हम तो तब भी वैसे ही थे जब… भूत-प्रेत,पिशाच ले आये थे, भस्म रचा और… निर्भीक हमने तुम्हें स्वीकारा था। हम तो अब भी वही हैं जिसे एक दिन, धोबी के उलाहने … Read more