पिंजड़ा

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** पिंजड़ा स्वर्ण जड़ित दीवारों का बना खूब सजा खूब बड़ा। सोने की कटोरी, मदे की भरी। अफ़सोस हाय! सब फीकी लगे। चाहत है परिन्दे की, नील-गगन में उड़े पंछी के पंख, बेजान पड़े। कटुक निबौरी चाहे मिले, नीड़ भले ना मिले। जल सरोवर का भले, शाखाओं की टहनी पर झूला पड़े। … Read more

भारत का चौकीदार

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** मैं हूँ भारत का चौकीदार दिन-रात रहता हूँ पहरेदार, घुसपैठ नहीं होने दूँगा दुश्मन को मैं ठोक दूँगा। परिंदों को पंख काटकर आकाश में मैं छोड़ दूँगा, भारत की शान को मैं कभी नहीं झुकने दूँगा। हिन्दुस्तान हमारी जान है मर्यादा पुरुषोत्तम की धाम है, अहंकारी का महाविनाश है यमलोक उनका … Read more

मुलाकात

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** ख्वाबों ख्वाहिशों आरजू की मुलाक़ात, खामोश जुबां उम्मीद की कशमकश का लम्हा। तकदीर की कशिश, लफ़्ज़ों अन्दाज़ की बात॥ सवाल-जवाब इजहार अरमान की तल्खी, बा-वफा खौफ से घायल॥ कभी सुकूं के आसमाँ में बादल से हालात, फासले जज्बात हौंसले, मकसदों के पैगाम के कायल। सूरज शाम के, आगोश की … Read more

मातृभूमि के लाल

कैलाश भावसार  बड़ौद (मध्यप्रदेश) ************************************************* अपने रक्त से तिलक लगाया, भारत माँ के भाल पर जितना गर्व करें उतना कम, मातृभूमि के लाल पर। उऋण कभी ना हो पायेंगे, क्रान्ति के दीवानों से पार नहीं पा सके थे बुज़दिल, जिन तीनों मस्तानों से अंग्रेजों से कभी ना भय था, अविजित थे जो काल पर। जितना … Read more

दिल की धड़कन

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ दिल ने धड़कना छोड़ दिया है, जबसे गए हो तुम दूर मुझसे। तब से नाम के सहारे जिन्दा हूँ, मैं डर गया हूँ तेरी वफ़ादारी से॥ तेरे दामन पर जो रंग लगता है, दिल मेरा यहां धड़कता है। कोई कैसे तुमको, मेरे से पहले रंग लगा सकता है। क्योंकि सबसे पहले … Read more

कविता का जन्म

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अबाध गति से अनजाने में, निशब्द भावनाओं का प्रवाह मानस पटल पर अंकित कुछ, अनबोले और अनछुए असंख्य विचार कल्पना का, मंथन कर उद्धेलित करते हैं अभिव्यक्ति को। जीर्ण-शीर्ण विचारों की सृष्टि में, संवेदना का उदगम ही प्रेरणा स्त्रोत बनता है। इन सभी भावों में क्रान्ति की, अग्नि प्रज्जवलित होने … Read more

दुश्मन भी गले मिल जाते हैं

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* ये भारत की धरती है दोस्तों, जहाँ सब मिल होली मनाते हैं। क्या तेरा-क्या मेरा यहाँ पर, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। इंद्रधनुषी रंगों के यहां तो, सभी ख्वाब दिखलाते हैं। प्यार मुहब्बत मिले जहाँ भी, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। रंगों के त्यौहार में देखो, सभी … Read more

निकाल दिया दिल से तुम्हें..

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** तेरी उस अदा का हूँ मैं आज भी दीवाना, भूल नहीं सकता तेरा वो खूबसूरत मुस्कुराना। हाँ सच में बस तुझे ही निहारना था मेरा काम, साँसें भी मैंने अपनी कर दी थी तेरे ही नाम। मैंने अपनी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत गुनाह किया था, तभी तो सौंप दी थी … Read more

ढूँढते रह जाओगे…

रीता अरोड़ा ‘जय हिन्द हाथरसी’ दिल्ली(भारत) ************************************************************ आने वाले कुछ साल में, मिलेंगे ऐसे हाल में। हर कोई बदहाल में, तरसेंगे बोलचाल में। ढूँढते रह जाओगे…ll माँ को तरसेंगी माॅम, भारत की सारी कौम। शहर बनेंगे सभी गाँव, तरसेंगे पेड़ों की छाँवl ढूँढते रह जाओगे…ll चूल्हे पर पकी रोटी, खेलना सड़क पर गोटी। लड़की की … Read more

फागुन आया

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** हवाओं की नरमी जब मन को गुदगुदाने लगे नई-नई कोपलें जब डालियाँ सजाने लगें, खुशनुमा माहौल लगे,मन में उठें तरंग तब समझो फागुन आया,लेकर खुशियों के रंग। खिलते टेसू पलाश मन झूमे हो के मगन पैर थिरकने लगे नाचे मन छनन-छनन, बैर-भाव भूलकर खेलें जब सभी संग तब समझो फागुन … Read more