माँ

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** माँ नहीं होती संसार नही होता, पर्वत से भी ऊंचा चाँद नहीं होता। सूरज की किरणों में प्रकाश नहीं होता, आसमान से पानी की बरसात नहीं होती। न कहीं राम होता न कहीं श्याम होता, हर जगह सुनसान ही सुनसान होता। समुंदर की लहरें आसमान को छूती, धरती का पता नहीं … Read more

परदेशी सैयां

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* सैयां जी……..ओ सैयां जी, याद आए तेरी बतियां,बीती रतियां। कहती हैं सखियाँ,जोगन बनी क्यूँ, प्रेम दिवानी,आँखों में तेरी कैसा है पानी। होंठों की लाली हाय! किसने चुराई, हाथों की मेहंदी ऐसे फ़ीकी पड़ी क्यूँ। क्या मैं कहूँ जी बोलो न! ओ सैयां जी॥ मिलो जो मुझसे,कह दूँ तुमसे, ख़्वाबों में … Read more

सबके जैसा

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** न मिलेगा यहाँ तुझे कोई तेरे जैसा, तू यहाँ खुद ही बन के देख ले सबके जैसा। बैठा है आसमां पे वो सबका रखवाला, माँग ले उससे दुआ बनने की सबके जैसा। बैठा है आसमां पे सबकी दुआ सुनने को, तेरी दुआ पहुंचे वहाँ तो तू बने सबके … Read more

गगन घन बरसन…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ******************************************************************  (रचना शिल्प:इस पद्य में ‘अ’ के अलावा कहीं भी ‘अन्य स्वर की मात्रा’ का उपयोग नहीं किया गया है।) गगन घन बरसन। मगन मन हरषन। जलद भर उमड़न। धमक घर बरतन। पड़त जल छम छम। बजत डम डम डम। चमक नभ चमकन। सबन मन डरपन। पवन जब … Read more

चाहत

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** हम तो वैसे ही हैं जैसे तब थे, जब धरती पर वो सेब नहीं हम तुम ही थे। हम तो तब भी वैसे ही थे जब… भूत-प्रेत,पिशाच ले आये थे, भस्म रचा और… निर्भीक हमने तुम्हें स्वीकारा था। हम तो अब भी वही हैं जिसे एक दिन, धोबी के उलाहने … Read more

बारिशों का मौसम

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- रिम-झिम बरसो कारे बदरा तन-मन झुलसा जाए, तुम बिन कौन यहाँ मेरा जो आकर प्यास बुझाए। इक तो ये बारिश का मौसम,पास पिया ना मेरे, ये बारिश की बूँदें भी तन मन को आ कर घेरे। बागों में फिर झूले डल गए सखियाँ झूले सारी, एक अकेली बैठी ताकूँ,मैं … Read more

शब्द

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* शब्दों के जब बाण चलें तो, दिल घायल हो जाता है। कैसा भी हो नेह का बंधन, आखिर वो भी टूट जाता है। शब्द हमारे होंठों से यूँ, जब हवा में लहराते हैं। कहीं पर दिल में डाका डालें, कहीं पे आग लगाते हैं। जो सोच के शब्दों को … Read more

अस्तित्व

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** अपने को पहचानने की, कोशिश बरकरार है। आश्चर्य है मुझे स्वयं पर, कहाँ हूँ,क्या हूँ,कैसी हूँ… बस यही नहीं समझ पाती हूँ, कभी हवा में उड़कर अपनों को बुलंदियों पर पाना, कभी ठहर कर राह ताकते रह जाना… विवशता से और अचानक ही अकर्मण्य हो जाना, या कभी लहरों की … Read more

चंद्रयान

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* कहता था कवि कभी प्रेयसी से- “चाँद पर घर बनाऊँगा”, इसरो ने किया वादा,सपना मैं सजाऊँगा। आज अभिनंदन हर जन कर रहा, छोड़ दिया चंद्रयान-२,घर वहीं बनाऊँगा। दुनिया पग में काँटे लाख बिछाए, लाख करे बदनाम,संघर्ष कर लड़ जाऊँगा। नहीं चाहिए साथ किसी का,न किसी का नाम, अपने … Read more

ओ मेघ अब तो बरस जा

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** सूखी धरा तरसे हरियाली, जाती आबिया लाएगी संदेशा माटी की गंध का होगा कब अहसास हमें गर्म पत्थरों के दिल कब होंगे ठंडे, घनघोर घटाओं को देख नाचते मोर के पग भी अब थक चुके, मेंढक को हो रहा टर्राने का भ्रम ओ मेघ अब तो बरस जा…। छतरियां,बरसाती भूली … Read more