प्रियतम बिन सूना यह सावन
ओम अग्रवाल ‘बबुआ’मुंबई(महाराष्ट्र)*********************************************** जब पूनम का चँदा देखूँ,मैं दरिया के पानी में।जैसे प्रियतम ने छेड़ा हो,मुझको भरी जवानी मेंllप्रियतम बिन सूना यह सावन,अब तो प्रियतम आ जाओ,तन-मन मचल रहा है मेरा,कुछ तो आन लजा जाओll माथे की बिंदिया बुला रही है,काजल की आवाज सुनो,गजरा झुमकी कंगन नथनी,इनके भी तो साज सुनो।बिन खुशबू-सी बगिया अपनी,आकर तुम … Read more