क्या ‘राम मंदिर’ की सियासी कमाई ‘एनआरसी’ में गंवा रही भाजपा ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** क्या राम मंदिर से कमाई राजनीतिक जमीन भाजपा एनआरसी और सीएए में गंवा रही है ? क्या राष्ट्रीय मुद्दों का रथ राज्यों की सियासी जमीन पर पंक्चर हो रहा है ? क्या राज्यों में हो रही लगातार हार से भाजपा कोई सबक नहीं ले रही है”? संकल्पशक्ति और हठवादिता में बुनियादी … Read more

अधिनियम बनाम गढ़े गए विवाद

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** मुद्दा ‘नागरिक संशोधन कानून’………… दुनिया में हर विवाद का हल व समस्या का समाधान है,परन्तु गढ़े गए विवादों का जब तक निपटान होता है,तब तक बहुत अनर्थ हो चुका होता है और सिवाए पछतावे के कुछ हाथ नहीं लगता। नागरिकता सन्शोधन अधिनियम पर पैदा हुए विवाद को भी इसी श्रेणी में … Read more

आजाद भारत में कितनी आत्मनिर्भर हैं महिलाएं!

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** लैंगिक समानता में भारत ११२ वें स्थान पर पहुंचा,जिनमें शिक्षा,स्वास्थ्यऔर राजनीतिक ताकत में महिलाओं के साथ भेदभाव ख़त्म होने में ९९ वर्ष लगेंगे,ये बात विश्व आर्थिक मंच की ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट २०२० में बताई गई हैl देश को आजाद हुए सात दशक बीत चुके हैं। इन सात दशकों में भारत … Read more

क्यों भार लगने लगती है जिन्दगी ?

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* जीवन से जुड़ा एक बड़ा सवाल है कि विषम परिस्थितियां क्यों आती है ? जिन्दगी क्यों भार स्वरूप लगने लगती है ? क्यों हम स्वयं से ही खफा से रहने लगते हैं ? इसका सबसे बड़ा कारण है हमने जीने के जो साफ-सुथरे तरीके थे या जो जीवनमूल्य थे,उन्हें भुला दिया … Read more

राष्ट्रहित में सम्मान करना चाहिए कानून का

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** मुद्दा ‘नागरिकता संशोधन कानून’………. नागरिक कानून हम सब देशवासियों के लिए,नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वह अपने देश की सबसे बड़ी हानि कर रहे हैं। जो इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं,वह अपने देश का नुकसान ही कर रहे हैं,क्योंकि हम राष्ट्र … Read more

अब अदालत से ही आशा

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** मुद्दा ‘नागरिक संशोधन कानून’………………. संसद ने किसी कानून को स्पष्ट बहुमत से पारित किया हो और उसके खिलाफ इतना जबर्दस्त आंदोलन चल पड़ा हो,ऐसा स्वतंत्र भारत के इतिहास में कम ही हुआ है। ये तो नरेंद्र मोदी की किस्मत है कि इस समय देश में कोई अखिल भारतीय नेता नहीं … Read more

फूल की भूल

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** असल जीवन की यह कहानी ६ दिसम्बर १९५९ से सम्बद्ध है। सम्मान,अपमान और निष्कासन की एक ऐसी घटना घटी थी जिसने हर्ष-विषाद का समन्वित इतिहास रच दिया था,लेकिन दुर्भाग्यवश इतिहास ने उस यथार्थ को अपने आँचल में कोई विशेष स्थान नहीं दिया। आइए चलते हैं झारखंड (तत्कालीन बिहार) के धनबाद … Read more

विरोध बिल्कुल अनुचित,बारीकी से पढ़ने की जरूरत

इलाश्री जायसवाल नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* मुद्दा `नागरिकता संशोधन कानून`…………. ‘नागरिकता संशोधन कानून’ को आलोचक,नागरिक तथा लेखक की दृष्टि से पढ़ा। इस कानून के विषय में पढ़ने पर मुझे ज्ञात हुआ कि इस कानून के तहत भारत सरकार बांग्लादेश,अफगानिस्तान तथा पाकिस्तान देशों से आए हुए अल्पसंख्यक शरणार्थियों जो बौद्ध,हिंदू, सिख,जैन,पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारत … Read more

तुझमें राम,मुझमें राम और हम सबमें राम

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** किसी भी राष्ट्र का अस्तित्व और अस्मिता,स्वत्व और स्वाभिमान उस देश के श्रद्धा व आस्था केन्द्रों,महापुरुषों के स्मृति स्थलों तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण व संवर्धन पर निर्भर करता है। यथा यह इतिहास का कड़वा सच है कि बर्बर विदेशी आक्रांताओं ने हमारे हजारों श्रद्धा,पुण्य और प्रेरणा केन्द्रों को ध्वस्त कर … Read more

कहां सावरकर और कहां राहुल ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हमारे आजकल के नेताओं से यह आशा करना कि वे नेहरु, लोहिया,श्यामाप्रसाद मुखर्जी,विनोबा,अटलबिहारी वाजपेयी और नरसिंहराव की तरह पढ़े-लिखे होंगे,उनके साथ अन्याय करना होगा। वे सत्ता में हों या विपक्ष हों,उनका बौद्धिक स्तर लगभग एक-जैसा ही होता है। सलाहकार तो उनके भी होते हैं। लेकिन वे अपने स्तर के लोगों … Read more