बुराई के रावण का अंत जरूरी

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* दशहरा बुराइयों से संघर्ष का प्रतीक पर्व है,आज भी अंधेरों से संघर्ष करने के लिये इस प्रेरक एवं प्रेरणादायी पर्व की संस्कृति को जीवंत बनाने की जरूरत है। प्रश्न है कौन इस संस्कृति को सुरक्षा दे ? कौन आदर्शो के अभ्युदय की अगवानी करे ? कौन जीवन-मूल्यों की प्रतिष्ठापना में पहला … Read more

रावण ने `रक्ष संस्कृति` की स्थापना की

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** रावण को जन सामान्य में राक्षस माना जाता है,जबकि कुल,जाति और वंश से रावण राक्षस नहीं था। रावण केवल सुरों(देवताओं)के विरुद्ध और असुरों के पक्ष में था। रावण ने आर्यों की भोग-विलास वाली ‘यक्ष’ संस्कृति से अलग सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की स्थापना की थी। इस … Read more

घमंड और रावण

मधुसूदन गौतम ‘कलम घिसाई’ कोटा(राजस्थान) *****************************************************************************  दशहरा निकल गया,रावण जल गया,पर मेरे मन में प्रश्न अनेक सिर उठा रहे हैं।आखिर यह नवराते वर्ष में २ बार क्यों आते हैं ? रावण क्यों जलाया जाता है हर साल ? फिर भी नहीं मरता रावण..। यदि बुराई पर भलाई की जीत इसका कारण होता तो कंस पर … Read more

चंदेलों की बेटी वीरांगना दुर्गावती रही वीरता का प्रतीक

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** दुर्गाष्टमी के शुभ अवसर पर ५ अक्टूबर १५२४ को चंदेल वंश में बांदा, कालांजार(उत्तर प्रदेश) में जन्मी वीरांगना दुर्गावती का विवाह गढ़ मंडला राजा संग्राम शाह के सबसे बड़े पुत्र दलपत शाह से हुआ था। विवाह के कुछ साल बाद ही दलपत शाह चल बसे। पुत्र वीरनारायण की अल्प आयु के … Read more

उफ्! ‘खुले में शौच से मुक्ति’ अभियान का जानलेवा मोड़…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** देश को खुले में शौच से मुक्त कराने का एक अच्छा अभियान ऐसा हिंसक मोड़ ले लेगा,शायद ही किसी ने सोचा हो। मध्यप्रदेश में इसी वजह से ३ लोग जानें गवां चुके हैं तो अब मनुष्य के साथ पशुओं के(खुले में)शौच को लेकर भी हिंसा शुरू हो गई है। शायद यही … Read more

दोस्ती चेहरे की मीठी मुस्कान होती है

राजकुमार जैन ‘राजन’ आकोला (राजस्थान) ****************************************************** मनुष्य का जीवन संघर्षों से भरा पड़ा है। कदम-कदम पर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए किसी मित्र,सहयोगी की आवश्यकता होती है। कहा जाता है कि दोस्ती शब्द ‘दो+हस्ती’ से बना है। अर्थात जब दो हस्ती,दो शक्ति मिलती है तब मित्रता होती है। दोस्ती होने का सीधा अभिप्रायः है कि … Read more

पंजाब:हवन करें,पर हाथ बचा कर

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** विगत सप्ताह अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदीकार्यक्रम से पहले सिख संगठनों से मिलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास दिलवाया कि वे जल्द ही उन्हें उपहार देंगे। इस घोषणा के कुछ दिन बाद ही केन्द्र सरकार ने ३१२ सिख अलगाववादियों व आतंकियों के नाम काली सूची से हटा दिए … Read more

भाषा-लिपि की विविधता और एकरूपता तथा निदान

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** इंडिया में भाषा की लड़ाई लड़ते हुए लगभग १०० वर्ष से अधिक हो गए हैं,और स्वतंत्र हुए ७० वर्ष से अधिक,भाषा जैसे इस देश में कोई रोग हो गया हैl ऐसा संक्रामक रोग,जिसका इलाज़ सरकारों के पास नहीं हैं और जनता तो जहाँ लाभ देखती है वहां जाती हैl जैसे आज … Read more

गांधी जी की नज़र में हिन्दी

प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी दिल्ली *************************************************************************** युगपुरुष,युगनिर्माता और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारत के स्वंतत्रता आंदोलन के महानायक थे। महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान न केवल उस युग की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर विचार किया,वरन् इस युग की हिन्दुस्तानी जाति के गठन और उसके सांस्कृतिक परिवेश के युग पर भी चिंतन किया। इस … Read more

हमारे गांधी

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** “दे दी हमें आज़ादी,बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।” ये पंक्तियां गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत की ताकत पूरी तरह प्रर्दशित करने में सक्षम है। किसी भी स्थिति में सत्य और अहिंसा का साथ न छोड़ने वाले गांधी जी अपने विचारों से न सिर्फ … Read more