जिन्दगी और साहित्य
योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* आदमी जैसे ही जन्म लेता है और बढ़ता जाता है,साहित्य की भी वृद्धि उसी अनुरूप होती जाती है। जन्म के बाद ही छठी-गीत गाया जाता है और सनातन धर्म में १६ संस्कार तो मृत्युपर्यंत होते हैं जिसमें हर स्तर पर साहित्य जुड़ा रहता है।तब साहित्य क्या है ? ‘सहितस्य … Read more