जिन्दगी और साहित्य

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* आदमी जैसे ही जन्म लेता है और बढ़ता जाता है,साहित्य की भी वृद्धि उसी अनुरूप होती जाती है। जन्म के बाद ही छठी-गीत गाया जाता है और सनातन धर्म में १६ संस्कार तो मृत्युपर्यंत होते हैं जिसमें हर स्तर पर साहित्य जुड़ा रहता है।तब साहित्य क्या है ? ‘सहितस्य … Read more

अब ‘अंकीय खानाबदोशी’ का दौर…

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** कोरोना काल में हम जिस घर पर काम(वर्क फ्रॉम होम) की कवायद सीख रहे थे,उसी दौरान दुनिया एक पायदान ऊपर चढ़कर खानाबदोश की तरह कहीं से भी काम(वर्क फ्राॅम एनीवेयर)को अपना रही थी। अब भारत में इस नई कार्य संस्कृति को लागू करने की शुरूआत देश के सबसे बड़े ‘स्टेट बैंक ऑफ … Read more

भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* २५ जून १९७५-यह तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला धब्बा हैI इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था,जो २१ मार्च १९७७ तक यानि २१ महीने तक चलाI क्यों लगा आपातकाल और क्या रहा उसका असर ? आपातकाल की घोषणा कानून व्यवस्था बिगड़ने,बाहरी आक्रमण और वित्तीय … Read more

भारत और चीन अब आगे की सुध लें

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** भारत और चीन के कोर कमांडरों की बैठक में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने पर सहमति व्यक्त की है। यह बैठक १०-११ घंटे तक चली। बैठक में क्या-क्या बातें तय हुई हैं,यह अभी विस्तार से पता नहीं चला है। कौन कितना पीछे हटेगा,कहां-कहां से हटेगा,हटने के बाद दोनों सेनाओं … Read more

हिन्दी के योद्धा: जॉन गिलक्रिस्ट

डॉ. अमरनाथ शर्माकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** विशेष श्रंखला:भारत भाषा सेनानी जॉन बोर्थविक गिलक्रिस्ट(जन्म-१९ जून १७५९)ऐसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने हिन्दुस्तान की जातिय भाषा की सबसे पहले पहचान की,उसके महत्व को रेखांकित किया,भारत में उसके अध्ययन की नींव रखी,उसका व्याकरण बनाया और इंग्लिश-हिन्दुस्तानी कोष बनाकर अध्ययन करने वालों के लिए रास्ता आसान कर दिया। एडिनबरा में जन्म … Read more

चीन:इस दर्द की दवा क्या है ?

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)***************************************************************** रूस में साम्यवाद के अंत के बाद दुनिया ने कितनी राहत की साँस ली,उसकी कल्पना वही पीढ़ी कर सकती है जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में चार दशकों तक चले शीतयुद्ध में रूसी खेमे और अमेरिकी खेमे की तनातनी को झेला। रूसी साम्यवाद के पतन में आंतरिक परिस्थितियां तो जिम्मेवार थी … Read more

हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ राष्ट्रीय समस्या

कर्नल डॉ. गिरिजेश सक्सेना ‘गिरीश’भोपाल(मध्यप्रदेश)******************************************************************** भारत एक सार्वभौम संवैधानिक लोकतंत्र है और भारतीय लोकतंत्र के तीन संवैधानिक स्तम्भ हैं,यथा-विधायिका,कार्यपालिका एवं न्याय पालिका,जिनके संगठन,कार्य,कार्यपद्धति संविधान में निहित है| ,प्रबुद्ध भारत एवं उद्बोध,इंडियन ओपीनियन(महात्मा गाँधी)सहित वंदे मातरम आदि उस समय के मुखर पत्र-पत्रिका थे,जिनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को ना कोई नकार सकता है,न भूल सकता हैl … Read more

अब नई दुनिया गढ़े भारत

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ********************************************************************** भारत ८ साल बाद फिर आठवीं बार सुरक्षा परिषद का सदस्य चुन लिया गया है। यह सदस्यता २ साल की होती है। सुरक्षा परिषद में कुल १५ सदस्य हैं। उनमें से ५-अमेरिका, रुस,चीन,ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इनमें से प्रत्येक को ‘निषेधाधिकार'(वीटो) का अधिकार है। शेष १० अस्थायी सदस्य किसी भी … Read more

मानसिक संघर्ष और नारी

अंशु प्रजापतिपौड़ी गढ़वाल(उत्तराखण्ड)**************************************************************** ‘कोरोना’ महामारी के चलते एक स्व प्रेरित वेबिनार हमारे कुछ शिक्षक बंधुओं के माध्यम से आयोजित की गई,जिसमें मुझे प्रतिभाग का सुअवसर प्राप्त हुआ ।प्रतिदिन नए विषय पर चर्चा होनी थी,जिसमें एक दिन निर्धारित था जीवन और आध्यात्म के लिए। उस दिन जो चर्चा हुई,वो वास्तव में अदभुत थी। आयोजकों और प्रतिभागियों … Read more

ग्रहों का असर-हमारे जीवन पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* कहा जाता है कि ग्रह,नक्षत्र और राशि हमारे जीवन पर और प्रकृति पर भी असर डालते हैं। तब प्रश्न यह उठता है कि बहुत दूर पर स्थित ग्रह-नक्षत्र कैसे हमारे जीवन पर असर डालते हैं। अति व्यग्रता से हम सुबह अखबार का इंतजार करते हैं और आ जाने पर … Read more