भाईचारे से खिलवाड़ कब तक ?

ललित गर्गदिल्ली ************************************** देश लम्बे समय से शांत था, एकाएक एक वर्ग-विशेष एवं कतिपय राजनीतिक दलों को यह शांति, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं अमन-चैन की स्थितियां रास नहीं आई और उन्होंने साम्प्रदायिक भाईचारे एवं सौहार्द को खण्डित करने का सफल षडयंत्र रच दिया, लेकिन सर्वाेच्च न्यायालय ने अलग-अलग मामलों में यह बिल्कुल साफ कर दिया कि … Read more

मनुष्य और मनुष्यता

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** मनुष्य शरीर, जन्म से मिलता है, मग़र मनुष्य तभी कोई बनता है, जब उसमें मानवीय गुण विद्यमान हों, इंसानियत हो, मनुष्यता हो। पशु सिर्फ भोजन और प्रजनन तक सीमित रहते हैं, अगर खाना-पीना व प्रजनन बस यही मनुष्य भी करे तो क्या वह मनुष्य कहलाने योग्य है ? मनुष्य होने के लिए … Read more

सामाजिक संचार:सींच रहा या जड़ें खोद रहा ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** इसे संयोग मानें या कुछ और कि दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने सामाजिक संचार (सोशल मीडिया) माध्यम ट्विटर को ४४ अरब डाॅलर में जिस दिन खरीदा, उसके ४ दिन पहले ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि तमाम सामाजिक संचार माध्यम लोकतंत्र को ‘कमजोर’ … Read more

शाहबाज़ शरीफ की परेशानियां

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** हमेशा की तरह पाकिस्तान की इमरान सरकार ५ साल के पहले ही उलट गई। इस बार उसे पाकिस्तान की फौज ने नहीं, अदालत ने उलटाया है। यदि फौज उसे उलटा देती तो भी अदालत उसे सही ठहरा देती, जैसे कि उसने पिछले तख्ता-पलट के वक्त ‘परिस्थिति की अनिवार्यता’ का सिद्धांत प्रतिपादित किया … Read more

आरक्षण:देशहित में समीक्षा जरूरी

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** देश में पिछले सत्तर साल से जातिगत आरक्षण लागू है, क्या इन सत्तर सालों में एक भी आरक्षित वर्ग का परिवार सामान्य बन पाया है या नहीं ? अगर नहीं तो फिर इस व्यवस्था को जारी रखने का क्या औचित्य है ? अगर विधायक, सांसद, मंत्री, अधिकारी बनने के बाद भी वह … Read more

योग-क्रांति है सुशासन क़ा आदर्श

ललित गर्गदिल्ली ************************************** दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश एवं दुनिया में मुफ्त की सुविधाओं के लिए जाने जाते हैं। अब उन्होंने दिल्ली में रहने वाले लोगों के लिए नि:शुल्क योग कराने का निर्णय लिया है, क्योंकि आम आदमी का भागदौड़ की प्रदूषणभरी जिंदगी में शरीर, मन और आत्मा स्वस्थ नहीं है, ऐसे में योग … Read more

अक्षय तृतीया:सर्वसिद्ध मुहूर्त वाला दिन

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** ‘अक्षय’ शब्द का मतलब है-जिसका क्षय या नाश न हो। मत्स्यपुराण, पद्मपुराण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण, स्कन्दपुराण में इस तिथि का विशेष उल्लेख है। यह दिन अबूझ या सर्वसिद्ध या स्वयंसिद्ध मुहूर्त में माना गया है, इसलिए सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन बेहद शुभ माना जाता है। जो वस्तु आपके जीवन … Read more

स्वदेशी, उद्यमिता और सहकारिता के भाव से ही स्वावलंबन

डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदीइंदौर (मध्यप्रदेश)********************************** वर्तमान में आधुनिकता की चाल में भाग रहे भोगवादिता के पुजारियों की स्थिति अत्यंत दयनीय प्रतीक हो रही है। पाश्चात्य का व्यापक दुष्प्रभाव भारतीय संस्कृति को बाज़ारवादी प्रवृत्ति की और ढकेलता जा रहा है। एक तरफ़ गाँव शहरों में परिवर्तित हो रहे हैं, वहीं छोटे क़स्बे शहर और शहर महानगरों … Read more

चरित्र सबसे बड़ी शक्ति

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** मनुष्य के भीतर अनेक शक्तियाँ निहित है, उन सभी में सबसे सर्वोत्तम स्थान चरित्र का है। मनुष्य जिनसे अपने अन्दर अच्छे आचरण और गुणों का विकास करता है, वह शक्ति चरित्र ही है। इसलिए चरित्र के सम्बन्ध में किसी ने यह उल्लेखनीय बात कही है कि, जिनके चरित्र से शील का … Read more

सरकार की अच्छी पहल, पर कैसे होगी सफल ?

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** महात्मा गांधी का सपना… इस विषय पर कोई विवाद नहीं कि मातृभाषा माध्यम से शिक्षा और राष्ट्रभाषा को लेकर जितना महात्मा गांधी ने कहा, लिखा और सार्थक प्रयास किए उतने शायद किसी और ने नहीं किए, लेकिन यह भी सच है कि उनके नाम और उनके माध्यम से सत्ता पाने वाले … Read more