हिन्दी के ‘भैय्या साहब’ पं. श्रीनारायण चतुर्वेदी

प्रो. अमरनाथकलकत्ता(पश्चिम बंगाल)******************************** “मेरे उत्तराधिकारी कौन हैं ? मेरे वंशज मेरे कानूनी उत्तराधिकारी मात्र हैं। वे मेरी भौतिक संपत्ति के(जो नगण्य है) उत्तराधिकारी हैं,किन्तु मेरे वास्तविक उत्तराधिकारी वे भावी युवक हैं जिनमें हिन्दी-प्रेम ही नहीं,हिन्दी का दर्द भी हो,वे नहीं जो मात्र साहित्य-रचना कर या संपादन या हिन्दी-अध्यापन कर अपना पेट पालते हों और इसी … Read more

एक संस्थान थे पं. विद्या निवास मिश्र

डॉ. दयानंद तिवारीमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************ पं. विद्या निवास मिश्र का सर्वाधिक मुख्य प्रदेय यह है कि आप भारतीय मनीषा और संस्कृति के आदिम स्वरूप से लेकर अधुनातन विकास सोपानों का गहन और विवेक सम्मत अध्ययन करते रहे हैं। संस्कृत, अंग्रेज़ी, हिंदी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य के आप अधिकारी विद्वान् हैं। पंडित जी साहित्य … Read more

माँ शारदे की अभ्यर्थना से ही ज्ञान व विद्या

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** बसंत पंचमी विशेष…. श्रीमद्भागवत-गीता में प्रभु श्रीकृष्ण जी ने स्वयं को ‘ऋतुनाम् कुसुमाकर:’ कहकर बसंत ऋतु की श्रेष्ठता प्रतिष्ठित की है। सभी जानते हैं कि पतझड़ पश्चात बसन्त ऋतु में माघ शुक्ल पंचमी को वसंत पंचमी के अलावा श्रीपंचमी या ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन … Read more

विवेक की देवी हैं माँ सरस्वती

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* बसंत पंचमी विशेष…. ‘अक्षर का तूने सार दिया,मातु शारदे।सच्चाई का संसार दिया,मातु शारदे।मैं खोया था अविवेक के अँधियार में मगर,उजियार का उपहार दिया मातु शारदे॥’ सरस्वती को वागीश्वरी,भगवती,शारदा और वीणा वादिनी सहित अनेक नामों से संबोधित जाता है। ये सभी प्रकार के ब्रह्म विद्या-बुद्धि एवं वाक् प्रदाता हैं। संगीत की … Read more

बच्‍चों की प्रतिरोधकता के लिए तैयार खाद्य पदार्थ हानिकारक

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के साथ ही तीसरी लहर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इस लहर में बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इनका कहना है कि सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। संक्रमण के बढ़ते खतरे और टीका का उपलब्ध ना होना बच्चों … Read more

बजट:राहतों की बजाए आर्थिक विकास पर ज्यादा जोर

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** अमूमन बजट को लेकर आम आदमी की सोच यही रहती आई है कि सरकार राहतों के तोहफे देगी या फिर करों के बोझ से दम निकाल देगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन के चौथे बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह वैसा ही सीधा-सपाट बजट है,जैसा कि इसे पढ़ते समय … Read more

मालदीवःभारत के लिए गहन चिंता

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारतीयों को यह जानकर बहुत आश्चर्य होगा कि हमारे पड़ौसी देश मालदीव में आजकल एक जबर्दस्त अभियान चल रहा है,जिसका नाम है- ‘भारत भगाओ अभियान!’ भारत-विरोधी अभियान कभी-कभी नेपाल और श्रीलंका में भी चलते रहे हैं लेकिन इस तरह के जहरीले अभियान की बात किसी पड़ौसी देश में पहली बार सुनने में … Read more

सर्दी में गुनगुनी धूप बड़ी फायदेमंद

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’बीकानेर(राजस्थान)*********************************************** सभी जानते हैं कि स्वस्थ हड्डियों और मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए विटामिन डी अति आवश्यक है। सभी विशेषज्ञों ने धूप को विटामिन डी का न केवल मुख्य स्रोत,बल्कि बुढ़ापे में अत्यन्त प्रभावकारी बताया है। हालाँकि,कुछ खाद्य पदार्थों से भी इसकी पूर्ति की जा सकती है लेकिन अनुभव के आधार … Read more

शाकाहार बन रहा विश्व-व्यापी

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* क्या आपको यह जानकर आनंद नहीं होगा कि दुनिया के सबसे ज्यादा शुद्ध शाकाहारी लोग भारत में ही रहते हैं। ऐसे लोगों की संख्या ४० करोड़ से ज्यादा है। ये लोग माँस,मछली और अंडा वगैरह बिल्कुल नहीं खाते। यूरोप,अमेरिका,चीन,जापान और मुस्लिम देशों में कई बार यह वाक्य सुनने को मिला कि ‘हमने … Read more

हिन्दी में ‘निर्णय’ का संकल्प:न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त

प्रो. अमरनाथकलकत्ता(पश्चिम बंगाल) ******************************** इटावा (उ.प्र.) में जन्मे,इटावा तथा इलाहाबाद में पढ़े-लिखे न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त (१५ जुलाई १९३०-२३ जनवरी २०१३) हिन्दी में फैसला सुनाने वाले अन्यतम न्यायाधीश के रूप में विख्यात हैं। १९७७ में वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हुए। हिन्दी में कार्य करने और निर्णय देने की प्रेरणा उन्हें … Read more