रामराज्य में लोकतान्त्रिक मूल्य

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)********************************** लोकतन्त्र के दो रूप कहे जा सकते हैं,एक दण्डात्मक व दूसरा गुणात्मक। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने लोकतन्त्र की सुन्दर व्याख्या करते हुए इसे लोगों पर लोगों के द्वारा लोगों की व्यवस्था बताया,लेकिन इसमें मजबूत राष्ट्र,सुरक्षा प्रणाली और निष्पक्ष न्यायपालिका की अनिवार्यता अपरिहार्य है। व्यवस्था सुन्दर तो है, परन्तु इसका क्रियान्वयन … Read more

नहीं बनेगा भारत मोहरा ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* भारत,अमेरिका,जापान और आस्ट्रेलिया-इन चार राष्ट्रों के चौगुटे का जो पहला शिखर-सम्मेलन हुआ, उसमें सबसे ध्यान देनेवाली बात यह हुई कि किसी भी नेता ने चीन के विरुद्ध एक शब्द भी नहीं बोला, जबकि माना जा रहा है कि यह चौगुटा बना ही चीन को टक्कर देने के लिए है। इसका नाम है-क्वाड … Read more

निजीकरण कितना वास्तविक…

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** आज सरकार अंधाधुंध निजीकरण की वकालत कर रही है,सरकारी कर्मचारियों के निकम्मेपन की हर जगह चर्चा हो रही है,पर आइए इस पर विचार करते हैं।दूध में पहले केवल पानी मिलाया जाता था,फिर मलाई मारी जाने लगी,और अब यूरिया और डिटर्जेंट वाला दूध मिलता है। अपवाद छोड़ दें तो आपके हमारे घर में … Read more

समाज में हिंदी

विवेक गुप्ता*************************************** पीढ़ियों का अंतर तो हर दौर में रहा है,बुज़ुर्ग और युवा पीढ़ी के बीच संवाद की कमी हमेशा ही रही है,फिर आज के वृद्ध ख़ुद को अधिक उपेक्षित क्यों महसूस करते हैं ?कारण है,उनका भावी पीढ़ी से संवाद भी कम या लगभग ख़त्म हो गया है। महज़ तीन-चार दशक पहले तक बच्चों और … Read more

शहर से अच्छा अपना गाँव

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************** भारत गाँवों का देश है। गाँव को स्वर्ग सम माना जाता है। शान्त,सुखद,मनोहर खेत,खलिहान,कूप- नदी,पोखर,वन-पादप,कच्ची एकपथिया केदारी पथ,मन्द-मन्द सतत् प्रवाहित शीतल पवन,हरियाली फसलों भरी सुन्दर मनभावन खेत और मिट्टी की दीवाल से बने खपरे,घासों से बनी छतरूप छज्जियों वाले घर,उसमें की गई खूबसूरत रंगीली दुल्हन-सी नक्काशियाँ,बाँसों के तोरण द्वार,लालटेन,दीया, … Read more

उपलब्धि:भवानी की तलवार और मिताली के रनों का अम्बार…!

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************** एक तरफ राजनीति के मैदान में देश की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी पश्चिम बंगाल में अपनी सत्ता बचाने की जी-तोड़ कोशिश में लगी हैं,दूसरी तरफ खेल के मैदान में भारत की २ महिला खिलाड़ियों ने कामयाबी का ऐसा परचम फहराया है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। सफलता की … Read more

माँसाहार मतलब मौत…

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** शोध-अध्ययन….. सबसे पहले हमें भोजन और आहार में अंतर समझना चाहिए। भोजन यानी भोग से जल्दी नष्ट होना,जबकि आहार यानी जो आरोग्यवर्धक और हानिरहित होता है। शाकाहार यानी शांतिकारक और हानिरहित जो आहार होता है,उसको शाकाहार कहते है,जबकि माँसाहार यानी जो मानसिक और शारीरिक रूप से हानि पहुंचाए।माँसाहार किसी भी धर्म में मान्य … Read more

इस्लामःअरबों की नकल जरुरी नहीं

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************* स्विटजरलैंड ताजातरीन देश है,जिसने बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिया है। दुनिया में सिर्फ हिंदू औरतें पर्दा करती हैं और मुस्लिम औरतें बुर्का पहनती हैं। मुस्लिम देशों में देखा है कि विश्वविद्यालयों में जो महिला प्राध्यापक पढ़ाती थीं,वे भी बुर्का पहन करके आती थीं। बुर्का पहनकर ही वे कार भी चलाती थीं। अब … Read more

पवित्र हदय ही उत्तम तीर्थ

रोहित मिश्र, प्रयागराज(उत्तरप्रदेश) ********************************************** भारतीय समाज में ये मान्यता है कि गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं। यानि आपके मन में अगर कुछ गलत विचार है तो गंगा स्नान करने से वे गलत विचार आपके मन से हट जाएंगे। इसका अर्थ ये नहीं है कि आप दिनभर गलत कार्यो में … Read more

मनुष्य के पास मानवता नहीं तो,जीवन निरर्थक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) *********************************** मानवता मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म होता है। यह हर मनुष्य के लिए ज़रूरी है। अगर कोई मनुष्य दूसरों की सहायता करके मानवता नहीं दिखाएगा तो उस मनुष्य की सहायता भगवान भी नहीं करता है।जिस मनुष्य के पास मानवता नहीं है,उसका जीवन निरर्थक है। इस धरती पर मनुष्य का जन्म … Read more