सकारात्मक सोच से संकल्पों को बुनें

ललित गर्गदिल्ली ****************************************************** कोरोना महासंकट से उबरते हुए हमें एक नयी जीवनशैली विकसित करनी होगी,जिसमें नकारात्मकता,अवसाद और तनाव के अंधेरों को हटाकर जीवन को खुशियों के संकल्पों से भरना होगा। ऐसा करना कोई बहुत कठिन काम नहीं,बशर्ते कि हम जिंदगी की ओर एक विश्वास भरा कदम उठाने के लिए तैयार हों। डेन हेरिस एक सवाल … Read more

कैसे टिकेंगे ‘लव जिहाद’ रोधी कानून ?

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ************************************************** ‘लव ‍जिहाद’ मामले में विचित्र स्थिति बनती जा रही है। एक तरफ भाजपा सरकारें देश में लव जिहाद रोकने के लिए ऐलानिया तौर पर सख्त से सख्त कानून बनाए जा रही हैं,दूसरी तरफ ‘लव जिहाद’ के मामले अदालत में कमजोर(असफल)हो रहे हैं। गोया यह ‘लव जिहाद’ और अदालत के ‘लाॅ जिहाद’ में … Read more

सीढ़ियां चढ़ने का बड़ा फायदा

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** वर्तमान में मनुष्य अपने शरीर से पसीना नहीं निकालना चाहता है। इसके लिए वे पैसे खर्च करके और अलग से समय निकालकर जिम जाते हैं। आप दस मंजिला भवन में रहते हैं और उसमे लिफ्ट सुविधा है तो अपने को भाग्यशाली समझते हैं। इस कारण आपका आना-जाना सुगम और सरल हो जाता है,और … Read more

नेता और नौकरशाह: भ्रष्टाचार ही शिष्टाचार

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** ‘ट्रांसपेरेन्सी इन्टरनेशनल’ की ताजा रपट के अनुसार एशिया में सबसे अधिक भ्रष्टाचार यदि कहीं है तो वह भारत में है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को इससे गंदा प्रमाण-पत्र क्या मिल सकता है ? इसका अर्थ क्या हुआ ? क्या यह नहीं कि भारत में लोकतंत्र या लोकशाही नहीं,नेताशाही और नौकरशाही है … Read more

राजनीति की गँगा-कितनी मैली

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)***************************************************** आखिर राजनीति में ये सब क्या हो रहा है,राजनीति की गंगा कितनी मैली और विषैली हो गई है। अपने को दूसरों से अलग बताने वाली भाजपा अब अलग नहीं रही,सब दल सत्ता को किसी भी तरह हथियाने के चक्कर में गहरे दल-दल का रूप ले चुके हैं,बाहर कोई नहीं निकल पा रहाl … Read more

सेवा का दूजा नाम गुरु नानक देव

गोपाल चन्द्र मुखर्जीबिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************************* साम्प्रदायिकता से मुक्त तथा जातिगत सामाजिक कुरीतियों के नागपाश से मुक्त समाज व्यवस्था के संस्थापन से ही संसार तथा विश्व में स्थायी शान्ति संस्थापन संभव है,यह अनुभव आज से करीबन ५५१ वर्ष पहले रायभोई की तलवंडी(वर्तमान में ननकाना साहिव,पंजाब,पाकिस्तान) में कार्तिक पूर्णिमा के दिन अविर्भाव हुए महान दार्शनिक,समाज सुधारक,देशभक्त, कवि,विश्व बन्धु … Read more

अध्यादेश अच्छा,लेकिन….?

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** उत्तरप्रदेश सरकार ने ‘लव जिहाद’ के खिलाफ अध्यादेश जारी कर दिया है। उस अध्यादेश में लव जिहाद शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है,यह अच्छी बात है,क्योंकि लव और जिहाद दोनों शब्द परस्पर विरोधी हैं। लव जिहाद का हिंदी रुप होगा- ‘प्रेमयुद्ध’। जहां प्रेम होगा,वहां युद्ध नहीं हो सकता और जहां युद्ध … Read more

शाहीन बाग सरीखा किसान आंदोलन

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)*********************************************** पिछले साल नागरिकता संशोधन अधिनियम (सी.ए.ए.) को लेकर हुए शाहीन बाग आंदोलन और केन्द्र सरकार द्वारा पारित ‘कृषि सुधार अधिनियम’ को लेकर पंजाब सहित उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में हो रहे किसान आंदोलन के बीच की समानता को उर्दू शायर फैज के शब्दों में यूँ बयां किया जा सकता है-‘वो बात सारे … Read more

कहाँ गायब हुए विवेकानंद भट्टाचार्य…

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** पश्चिम बंग हिन्दी अकादमी का पुनर्गठन हुआ है। इसके लिए ममता बनर्जी की सरकार ने ५ करोड़ की धनराशि भी निर्धारित की है। ऐसे में मुझे २ दशक पहले की एक घटना याद आ रही है-उस समय वाम मोर्चे की सरकार थी। अकादमी सक्रिय थी,किन्तु उसकी गतिविधियों से मैं संतुष्ट नहीं … Read more

निकले थोथे यार!

डॉ.सत्यवान सौरभहिसार (हरियाणा)************************************ जब दौलत की लालसा,बांटे मन के खेत,ठूँठा-ठूँठा जग लगे,जीवन बंजर रेतl दो पैसे क्या शहर से,लाया अपने गाँव,धरती पर टिकते नहीं,अब सौरभ के पाँवl तुझमें मेरी साँस है,मुझमें तेरी जान,आओ मिलकर तय करें,हम अपनी पहचान। कहा सत्य ने झूठ से,खुलकर बारम्बार,यार मुखौटे और के,रहते हैं दिन चारl कौन पूछता योग्यता,तिकड़म है आधार,कौवे … Read more