शुभकामनाएं अकाली दल,राष्ट्रवाद थामे रहिए

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)*********************************************** कृषि कानून-२०२० के चलते शिरोमणि अकाली दल ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठजोड़ का साथ छोड़ दिया है। लोकतंत्र में हर दल को अधिकार है कि वह अपनी नीतियों व इच्छा के अनुसार किसी भी दल या गठजोड़ का साथ दे सकता या विरोध कर सकता है। अकाली दल … Read more

रामलीला मंच से नएपन से जोड़ना होगा नयी पीढ़ी को

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)********************************************** आज विद्युत संचार साधनों का युग है। घर बैठे विश्व दर्शन,दूर देशों से बातचीत और मनोरंजन के साधनों की श्रीवृद्धि ने मंचीय रामलीला, नौटंकी और नाटकों के महत्व को कम कर दिया है। आज की तीव्र गति से भागती हुई जीवन-शैली में रोजी रोटी के संघर्ष परस्पर दूर होते रिश्ते,मनुष्य- मनुष्य में विकसित … Read more

हिंदी के समर्थन में प्रचंड जनसंख्या खड़ी करने के अंतर्राष्ट्रीय लाभ क्या ?

लीना मेहेंदले********************************** हिंदी पखवाड़े में एक प्रश्न बार-बार उठता है कि,क्या हिंदी कोई मौलिक भाषा है ? कितनी प्राचीन या कितनी नूतन है ? चूँकि इससे अधिक प्राचीन भाषाएं हैं,तो उनकी तुलनामें हिंदी की महत्ता कम हो जाती है,इत्यादि। साथ ही यह प्रश्न उठता है कि मैथिली को हिंदी से अलग करके एक प्रमुख भारतीय … Read more

गांधी दर्शन:भौतिक के साथ नैतिक स्वच्छता भी जरूरी…

अजय बोकिलभोपाल(मध्यप्रदेश)  ********************************************************** गांधी दर्शन की सबसे बड़ी खूबी और ताकत यह है कि,वैचारिक द्वंद् के बावजूद उसमें समन्वय का कोई न कोई प्रेरक और सर्वमान्य बिंदु न केवल खोजा जा सकता है,बल्कि व्यापक अमल भी किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रखर राष्ट्रवादी होने के साथ-साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी अपना प्रेरणा … Read more

मानवता का मानःएक चिन्तनीय विषय

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ***************************************************** मानवता का मान एक चिन्तनीय विषय हैl आज समाज देश या वैश्विक पटल लोभ, ईर्ष्या,द्वेष,झूठ,ठगी,लूट,भ्रष्टाचार,विस्तारवाद आदि राक्षसी दुष्कर्मों के दल-दल में फँसता जा रहा है। अपने स्वार्थों की सिद्धि के लिए आज मनुष्य किसी भी निकृष्ट कर्म को करने के लिए तैयार है। चाहे परिवार में आजीवन अपनी संतान … Read more

गांधी बाबा को मत मानो,गांधी की अवश्य मानो

निर्मलकुमार पाटोदीइन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************************** अगले २० साल के लिए नई शिक्षा नीति प्रस्तुत हुई है। इसमें अनेक विशेषताएं हैं। एक बड़ी विशेषता कौशल के आधार पर विद्यार्थी को आत्मनिर्भर बनाने की है,विद्यार्थी का जीवन निर्माण करने की है। इसमें पाठ्यक्रम को कम रखते हुए अन्य गतिविधियों को महत्त्व दिया गया है। शिक्षा नीति कोरी दिमाग़ी और किताबी … Read more

कृषि-कानूनःकांग्रेस का शीर्षासन

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ******************************************************* संसद द्वारा पारित कृषि-कानूनों के बारे में कांग्रेस दल ने अपने-आपको एक मज़ाक बना लिया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस शीर्षासन की मुद्रा में आ गई है,क्योंकि उसने अपने २०१९ के चुनाव घोषणा-पत्र में खेती और किसानों के बारे में जो कुछ वायदे किए थे, वह आज उनसे एकदम उल्टी बात कह … Read more

नवरात्रि में जसगीत का महत्व और छत्तीसगढ़

डॉ.जयभारती चन्द्राकर भारतीगरियाबंद (छत्तीसगढ़) ********************************************************* माता फूल गजरा,गूंथव हो मालिन के देहरी फूल गजरा…,भारतवर्ष में नवरात्रि पर्व को वर्ष में २ बार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और देवी की आराधना की जाती है। वर्ष में ४ नवरात्रियां होती है जिनमें २ नवरात्रि गुप्त अथवा सुप्त नवरात्रि कहलाती है और २ नवरात्रि जागृत नवरात्रि कहलाती … Read more

घर वही,जहाँ बुढ़ापा खिलखिलाए

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’बहादुरगढ़(हरियाणा)***************************************************** किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर में बुजुर्ग सन्तुष्ट व प्रसन्नचित्त रहते हैं,वह घर धरती पर स्वर्ग के समान है,परन्तु आज आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में रिश्तों में उत्पन्न व्यवहारिकता,आपसी सामंजस्य व घटती सम्मान की भावना के कारण ऐसा स्वर्ग अब अपवाद का रूप लेता जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों … Read more

आदर्श जीवन की मिसाल गांधी और शास्त्री जी

संदीप सृजनउज्जैन (मध्यप्रदेश) *************************************************** गांधी जयंती विशेष………….. महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री ऐसे दो महामानव जो भारत के भाग्य विधाता रहे,जिनकी विचारधारा एक-दूसरे की पूरक रही। जो देश के लिए जिए और देश के हित में ही काल के ग्रास बने। देश और समाज के प्रति दोनों की समर्पण भावना में किंचित मात्र भी संदेह … Read more