समाज संस्कारक रहे राजा राममोहन राय

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ २२ मई जयंती विशेष………….. हिन्दीभाषा के विशेष प्रेमी व तत्कालीन अखण्ड भारतवर्ष के सुपुत तथा अनेक भाषाओं में प्रखर विद्वान, निर्भिक मानव दरदी,समाज सुधारक राजा राममोहन राय के जयंती के शुभ अवसर पर श्री चरणों में प्रणाम करते हुए श्रद्धार्घ अर्पण..। आज से हजारों वर्ष पूर्व में भारतवर्ष एक … Read more

भारत में २ हिंदुस्तान…

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** `कोरोना` के इन ५५ दिनों में २ हिंदुस्तान साफ-साफ दिख रहे हैं। एक हिंदुस्तान वह है,जो सचमुच कोरोना का दंश भुगत रहा है और दूसरा वह है,जो कोरोना को घर में छिपकर टी.वी. के पर्दों पर देख रहा है। क्या आपने कभी सुना कि,आपके किसी रिश्तेदार या किसी निकट मित्र … Read more

असली चुनौती अब राज्यों को झेलनी है

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* तमाम विपरीत परिस्थितियों,आशंकाओं और आपत्तियों के बीच भारत में लागू तालाबंदी का चौथा चरण अब अधिक चुनौतीभरा एवं गंभीर है। देश में ‘कोरोना’ संक्रमितों और इससे मरने वालों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है,वह बहुत चिन्ताजनक है। इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों … Read more

समझना मुश्किल,जीवन की पूर्णता है ‘प्रेम’

ओमप्रकाश मेरोठा बारां(राजस्थान) ********************************************************************* `प्रेम` का अर्थ आत्मा की संतुष्टि नहीं,बल्कि आत्मा का विस्तार है। भक्ति का मोल प्रेम है। ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रेम है,हर पीड़ा का अंत प्रेम है। हर शुभ का आरंभ प्रेम है। प्रेम ही जीवन की पूर्णता है। प्रेम हृदय का अनुराग और करुणा है। प्रेम हृदय को सरल … Read more

देश की समृद्धि में मील का पत्थर ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** भारत में संस्कारों का सूर्य इसीलिए अस्त नहीं होता,क्योंकि हम अपनी परम्परा को बार-बार दोहराते हैं और अनुसरण में भी लाते हैं। हम सिर्फ अपने लिए काम नहीं करते हैं, अपने परिवार के लिए नहीं कमाते हैं,अपनी जाति या धर्म के लिए दान नहीं देते हैं,हम संसार के सभी प्राणियों … Read more

तात्कालिक ‘तालाबंदी’ को स्थायी नशाबंदी में क्यों नहीं बदला जाए ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** ‘तालाबंदी’ को ढीला करते ही सरकार ने २ उल्लेखनीय काम किए। एक तो प्रवासी मजदूरों की घर वापसी और दूसरा शराब की दुकानों को खोलना। नंगे-भूखे मजदूर यात्रियों से रेल का किराया वसूल करने की इतनी कड़ी आलोचना हुई कि उनकी यात्राएं तुरंत निःशुल्क हो गईं लेकिन जहां तक शराब … Read more

‘कोरोना’,तेरा कितना रोना!

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** भारत वर्ष कृषि प्रधान,श्रमिक प्रधान,भूख प्रधान,झूठ प्रधान इत्यादि कितने प्रधान के साथ आबादी प्रधान देश है।यहाँ जन्म लेने वाला महान होता है,क्योंकि स्वर्ग का दूसरा नाम कश्मीर है और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसीलिए भारत स्वर्ग है। ऐसा सुना जाता है कि स्वर्ग में कोई भी कष्ट नहीं होता … Read more

`आत्मनिर्भर भारत` के सपने और चुनौतियां

गोपाल मोहन मिश्र दरभंगा (बिहार) ******************************************************************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने `कोरोना` प्रकोप से त्रस्त,आर्थिक नजरिए से ध्वस्त और अंतर्मन से जले-भुने भारतवासियों के लिए २० लाख करोड़ रुपए के जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है,वह बदलते वक्त के लिहाज से दूरदर्शितापूर्ण कदम है। साथ ही जितनी चतुराई से उन्होंने स्थानीय को आवाज यानि `लोकल … Read more

श्रम कानूनों में बदलाव:काम देंगे,या उसे छीन लेंगे..?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** क्या विडंबना है कि,`कोरोना` संकट में जहां प्रवासी मजदूरों की बदहाली और विवशता देख पूरा देश सिहर रहा था,वहीं ६ राज्यों ने ताबड़तोड़ तरीके से श्रमिक हितैषी कानूनों को बदल डाला। `तालाबन्दी` के बीच किए गए इस दूरगामी फैसले से नया राजनीतिक घमासान और आशंका का माहौल बन गया है। कांग्रेस … Read more

परिवार की खुशी में ही अपनी खुशी

प्रो.स्वप्निल व्यास इंदौर(मध्यप्रदेश) **************************************************** ‘विश्व परिवार दिवस’ १५ मई विशेष…….. परिवार मनुष्य के जीवन का बुनियादी पहलू है। व्यक्ति का निर्माण और विकास परिवार में ही होता है। परिवार मनुष्य को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करता है। व्यक्तित्व का विकास करता है। प्रेम,स्नेह,सहानुभूति,परानुभुति आदर-सम्मान जैसी भावनाएं सिखाता है।धार्मिक क्रियाकलाप सिखाता है। धर्म स्वयं में नैतिक है। … Read more