प्रकृति का परिवार

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. यह तो बहुत ही अच्छी बात है कि हम भी प्रकृति के परिवार के सदस्यों में से एक हैं। प्रकृति का परिवार बहुत ही बड़ा है। इसकी कोई सीमा नहीं है। इस धरती पर चल-अचल, सजीव-निर्जीव,दृश्य या अदृश्य रूप में जो कुछ भी है,वह सभी … Read more

कोरोनाःरेलें और बसें तुरंत चलाएं

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** ‘तालाबंदी'(लाॅकडाउन) की ज्यों ही घोषणा हुई,कुछ टी.वी. चैनलों पर कहा था कि यह ‘तालाबंदी’ बीमारी ‘कोरोना’ से भी ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकती है। कोरोना से पिछले दो हफ्तों में २० लोग भी नहीं मरे हैं और १००० लोग भी उसके मरीज़ नहीं हुए हैं लेकिन शहरों और कस्बों में … Read more

प्रकृति से मित्रता के रिश्ते को समझना होगा,बचाना होगा

गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ मानव जीवन में कुछ लोग जीवन यात्रा को आनंदमयी यात्रा मानते हैं,जबकि कुछ लोग दुखद मानते हैं। वे जरा-सा भी संकट आए तो दुखी हो जाते हैं। इंसान को हर पल चलते रहना चाहिए। मानवीय जीवन के साथ प्रकृति जुड़ी हुई है। प्रकृति से ही मानव का जीवन चलता है। हवा,पानी,अन्न … Read more

प्रकृति संरचना में मानव का महत्व

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. ‘प्रकृति संरचना में मानव का महत्व’ है,पर मानव से पहले प्रकृति की चर्चा-भारतीय पुराणों के अनुसार किवदंतियां हैं कि प्रकृति (सृष्टि)की रचना आदिकाल से पहले हमारे ईष्ट देवता ब्रह्मा,विष्णु,महेश जी ने की थी,जो किवदंती नहीं शत्-प्रतिशत सत्य है। सभी देवों ने प्रकृति के … Read more

मानव को प्राकृतिक संदेश ‘कोरोना’

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. बदलाव प्रकृति का नियम है और जीवन का आधार प्रकृति है। इसलिए ‘कोरोना’ हो या कोरोना जैसी कोई भी अन्य विकट वैश्विक चुनौती,जीवन-शैली बदलने की अति आवश्यकता होती है। चूंकि,प्रकृति जीवन जननी है और प्रत्येक जीव-जन्तु प्रकृति की कोख से उत्पन्न हुआ … Read more

‘कोरोना’ के आंतक से उपजी नैतिक बहस और नए सवाल…

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** पूरे विश्व में ‘कोरोना’ वायरस कोविद १९ के बढ़ते प्रकोप,विकसित देशों द्वारा इस पर समय रहते नियंत्रण में नाकामी और भारत जैसे देश में ‘पूर्ण तालाबंदी’ (कम्प्लीट लाॅक डाउन)के महाप्रयोग ने दुनिया में एक नई नैतिक बहस को जन्म दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि, ‘कोरोना’ जैसी वैश्विक महामारी … Read more

आयुर्वेद के अनुसार जनपदोध्वंस से बचाव ही इलाज

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** वर्तमान में जिस `कोरोना` नामक रोग के संक्रमण से पूरा विश्व भयाक्रांत है,और निरंतर जीवन-मृत्यु से संघर्ष कर रहे हैं,इसके सम्बन्ध में आयुर्वेद में बहुत व्यापक दृष्टि से वर्णन किया है,जो वर्तमान में जानना बहुत जरूरी है- `तमुवाच भगवानात्रेय —-एवंसमनेवतामप्येभिरगिनवेश ! प्रकृत्यादिभोरवामणुष्याणां येन्ये भावाः सामन्यास्तद्वयगनताय समानकालः समानलिंगाश्च व्याधायोअभिनिवरर्माणा जनपदमुद्धवनश्यन्ति .ते खलिवमे … Read more

`दोहन` नहीं,प्रकृति का पालन-पोषण आवश्यक

डॉ.पूर्णिमा मंडलोई इंदौर(मध्यप्रदेश) ***************************************************** प्रकृति और मानव स्पर्धा विशेष…….. मनुष्य सदियों से प्रकृति की गोद में पलता रहा हैl मानव और प्रकृति के बीच बहुत गहरा संबंध है। दोनों एक-दूसरे के पूरक ही नहीं,बल्कि एक-दूसरे पर निर्भर है। वास्तव में तो मनुष्य प्रकृति का ही अंग है। प्रकृति हमें जो देती है,वह अमूल्य है उसे … Read more

जीत एक लंबे संघर्ष की

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** तारीख पे तारीख,फिर तारीख,तारीख ही तारीख..२६५१ दिन(सात वर्ष तीन माह चार दिन)लम्बा यह तारीखों का सिलसिला २० मार्च की सुबह साढ़े ५ बजे तब थम गया,जब निर्भया के चारों दरिंदे हत्यारे फाँसी के फंदे पर चढ़ा दिए गए। १६ दिसम्बर २०१२ का वो काला दिन,जब गुनहगार उस ‘निर्भया’ का सम्मान … Read more

संदेश है प्रकृति का

पवन प्रजापति ‘पथिक’ पाली(राजस्थान) ************************************************************************************** सृष्टि के प्रारम्भ में प्रकृति ने जब सभी जीवों की रचना की तो दो पैरों वाले जीव ‘इंसान’ को सबसे अधिक ताकत ‘दिमागी ताकत’ दी। प्राकृतिक संसाधनों का अकूत खजाना उसे सौंपा,साथ ही सब जीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी उस दो पैरों वाले जीव को दी, लेकिन समय के … Read more