नीतीश ने दिखाया रास्ता मोदी को

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसा काम कर दिखाया है,जो उन्हें नेताओं का नेता बना देता है। पिछले कुछ दिनों से उनकी छवि गठबंधन-बदलू नेता की बन रही थी,लेकिन उन्होंने बिहार की विधानसभा से `राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर` के खिलाफ प्रस्ताव पारित करवाकर चमत्कार-सा कर दिया है। वह प्रस्ताव सर्वसम्मति … Read more

हिन्दी-प्रेमी वीर सावरकर

वीर विनायक दामोदर सावरकर २ आजन्म कारावास की सजा पाकर कालेपानी नामक कुख्यात अन्दमान की सेल्युलर जेल में बन्द थे। वहाँ पूरे भारत से तरह-तरह के अपराधों में सजा पाकर आए बन्दी भी थे। वीर सावरकर उनमें सर्वाधिक शिक्षित थे। वे कोल्हू पेरना,नारियल की रस्सी बँटना जैसे सभी कठोर कार्य करते थे। इसके बाद भी … Read more

अतुलनीय भारतीय:विपदाओं का विकल्प तलाशें भारतवासी

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’ बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************************************** वक्त गुजरता रहता है। वक्त के साथ आबो-हवा माहौल,या कहें कि हालात बदलते रहते हैं। हालांकि,सुख-सुविधा,साधन,सम्पन्नता के प्रति आकर्षण मानवीय स्वभाव के लक्षण हैं,परन्तु अपनी सम्पदा, सम्प्रभुता को खोकर हासिल किए गए सुख-सुविधा,साधन कितने भी समृद्ध क्यों न हों,भविष्य में कभी न कभी नुकसानदायी ही बनते हैं। बदलाव … Read more

दिल्ली को शस्त्र नहीं,सौहार्द की जरुरत

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से जो हालात बने हैं,वे न केवल त्रासद एवं शर्मनाक हैं,बल्कि भारत की संस्कृति एवं एकता को धुंधलाने वाले हैं। दिल्ली में जो हिंसा,आगजनी,विध्वंस के उन्मादी हालात देखने को मिले,उससे मन बहुत दुःखी हुआ,वैसे इन भीषण अत्याचारों, तोड़-फोड़ एवं हिंसा के हालातों से सभी बहुत दुखी … Read more

ट्रम्प यात्रा:अमेरिकी मीडिया में समोसे और व्यापारिक सौदा न होने की सुर्खियां

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** अ‍मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सपरिवार भारत की ३६ घंटे की यात्रा की (भारत के लिहाज से)ठोस परिणति ३ अरब डॉलर के रक्षा सौदों तथा गैस व तेल के समझौतों के रूप में हुई,लेकिन अमेरिका में इसे खास महत्व नहीं मिला,गोया यह तो होना ही था। भारत की दृष्टि से सबसे … Read more

क्या जैविक युद्ध वैज्ञानिक प्रगति का द्योतक ?

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** `राष्ट्रीय विज्ञान दिवस`-२८ फरवरी विशेष……….. प्राचीन काल से ही भारत का विज्ञान,गणित और खगोलशास्त्र बहुत सम्रद्ध रहा है। हम अपने विद्यालयीन समय से ही `विज्ञान के चमत्कार` विषय पर निबंध लिखते आए हैं। आग की खोज,पहिए की खोज,बैलगाड़ी,बस,ट्रेन,हवाई जहाज,रॉकेट की खोज करते हुए मानव ने कब प्रकृति को अपने अधीन … Read more

‘विष्णु’ के हाथ भाजपा का कमल

हेमेन्द्र क्षीरसागर बालाघाट(मध्यप्रदेश) *************************************************************** हालिया भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने युवाओं के प्रेरणास्त्रोत कहे जाने वाले जबर्दस्त जमीनी नेता मध्य प्रदेश के खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जवाबदेही सौंपी है। श्री शर्मा ने अपने सामाजिक और राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। इसके बाद … Read more

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया हिंदी को सम्मान

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’ मुम्बई(महाराष्ट्र) *************************************************************** स्वतंत्रता के पश्चात विदेशों में या अपने देश में विदेशी नेताओं के सम्मुख हमारे यहाँ अंग्रेजी में बोलने का ही रिवाज रहा। जिस प्रकार हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने अपने शासनकाल में देश-विदेश में अपने संबोधनों में हिंदी का प्रयोग करना शुरू किया,उससे निश्चय ही … Read more

प्रकृति और हम

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** प्रकृति क्या है ? देखा जाए तो प्रकृति हमारे आसपास ही है। हमारे इर्द-गिर्द हरे पेड़-पौधे,सरसराती हवाएँ,पौधों पर जीवन व्यतीत कर रहे जीव-जन्तु, कलकल बहती नदियाँ, ऊँचे पहाड़ यही तो प्रकृति है,जिसके करीब हम रहना चाहते हैं,जो हमें पसंद है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है कि हम पिकनिक मनाने … Read more

उत्तरशती के विमर्शों के बीच साहित्य की सत्ता के सवाल

प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा उज्जैन (मध्यप्रदेश) **************************************************************** साहित्य की सत्ता मूलतः अखण्ड और अविच्छेद्य सत्ता है। वह जीवन और जीवनेतर सब-कुछ को अपने दायरे में समाहित कर लेता है। इसीलिए उसे किसी स्थिर सैद्धांतिकी की सीमा में बाँधना प्रायः असंभव रहा है। साहित्य को देखने के लिए नजरिये भिन्न-भिन्न हो सकते हैं,जो हमारी जीवन-दृष्टि पर निर्भर … Read more