गांधीवाद-जो सिखाता है जीने की कला

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) *********************************************************************** शहीद दिवस(३० जनवरी) विशेष…………….. `गांधीवाद` महात्मा गांधी के आदर्शों,विश्वासों एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को कहा जाता है,जो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे बड़े राजनीतिक एवं आध्यात्मिक नेताओं में से थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है,जो गांधीजी ने जीवन पर्यंत जिया था। `सत्य` … Read more

अधिकारी `स्वामी` ना होकर मात्र `सेवक`

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* गणतंत्र दिवस हमारा सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्यौहार है,जिसके लिए हमारे वीर क्रांतिकारी बलिदानियों ने सर्वस्व त्याग कर दिया था और अपने प्रधान,अपने निशान एवं अपने संविधान हेतु प्राणों की आहूतियां दी थीं। फलस्वरूप भारतीय नागरिकों को स्वामी के रूप में मतदान का अधिकार मिला,जिसके प्रयोग से हमारे … Read more

गणतंत्र के सात दशक

अवधेश कुमार ‘अवध’ मेघालय ******************************************************************** `परिवर्तन का जोश भरा था,कुर्बानी के तेवर में। सब कुछ हमने लुटा दिया था,आजादी के जेवर मेंll` हम खुशनसीब हैं कि इस वर्ष २६ जनवरी को ७१वाँ गणतन्त्र दिवस मना रहे हैं। १५ अगस्त सन् १९४७ को पायी हुई आजादी कानूनी रूप से इसी दिन पूर्णता को प्राप्त हुई थी। … Read more

हिन्दी के ऑयरिश योद्धा:डॉ. सर जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन

डॉ. अमरनाथ शर्मा  ****************************************************** विशेष श्रंखला:भारत भाषा सेनानी…….. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन(७-१-१८५१)आयरलैंड के निवासी थे और भारतीय सिविल सर्विस के अधिकारी के रूप में भारत आएl विभिन्न पदों पर लगभग २६ वर्ष भारत में रहे,किन्तु उनकी ख्याति वास्तव में उनके द्वारा किए गए ११ खंडों में प्रकाशित महान ऐतिहासिक कार्य ‘भारत का भाषा सर्वेक्षण’ के कारण … Read more

गणतंत्र-गर्वतंत्र होकर चिंतातंत्र

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** अपने ७१ वें वर्ष में भारत का गणतंत्र खुद पर गर्व करे या चिंता करे ? सोचता हूँ कि वह दोनों करे। गर्व इसलिए करे कि अगर हम एशिया और अफ्रीका के देशों पर नज़र डालें तो हमें मालूम पड़ेगा कि उन सबमें भारत बेजोड़ है। इन लगभग सभी देशों … Read more

भारतीय गणतंत्र में जनता की भागीदारी

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……… भारतीय संघ की विविधता में एकता सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक `गणतंत्र दिवस` का महत्वपूर्ण पर्व दस्तक दे चुका हैl दिल्ली के राजपथ पर झांकियों के रूप में हम सब भारत के आगत-अनागत को देखते हैंl दुनिया दांतों तले उंगली दबा लेती है,दुश्मन सहम जाते हैंl हर … Read more

गणतंत्र का बदलता स्वरूप

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** अब हमें ७१वें गणतंत्र दिवस पर इस बात का गहनता से विचार करना है कि आज तक कितना स्वरूप बदला,बदला भी है,तो दिशा सकारात्मक है क्या ? इतनी अधिक जनसंख्या औऱ विविधता से भरे राष्ट्र में सबको साथ ले कर चलना,सबको बराबर मान-सम्मान देना,किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे,इसका … Read more

गणतन्त्र में गुणतन्त्र का समावेश हो

राकेश सैन जालंधर(पंजाब) ***************************************************************** देश में आधुनिक गणतन्त्र व्यवस्था के स्थापना की आज जयन्ती है। इसी दिन सन् १९५० को भारत द्वारा अधिनियम-१९३५ को हटाकर अपना संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए सन्विधान को २६ नवम्बर १९४९ को संविधान सभा द्वारा अपनाया … Read more

जय गणतंत्र,जय भारत

डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’  नागपुर(महाराष्ट्र) ************************************************************************* गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……… गणतंत्र दिवस के दिन,प्रातः ही दीक्षा,स्कूल जाने तैयार हो गयी थी।दीक्षा को अपने मित्रों के साथ,गीत और नृत्य की प्रस्तुति देनी थी। दीक्षा ने अपने पिता सुरेश को आवाज दी-“बापू,जल्दी तैयार हो जाओ। मुझे स्कूल जल्दी पहुंचना है। पता है ना,आज 26जनवरी है।” सुरेश … Read more

`शीशा-ए-‍दिल` ही नहीं, ‘शीशा-ए-दिमाग’ भी मुमकिन…!

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ***************************************************************** अभी तक दिल का रिश्ता शीशे से ही हुआ करता था,क्योंकि वह शीशे के माफिक टूट फूट जाता था। गाहे-बगाहे तड़क भी जाता था और कभी भी जुड़ भी जाता था,लेकिन इटली में हुई ताजा खुदाई और विश्लेषण से पता चला है कि इंसानी दिमाग भी शीशे में तब्दील हो सकता … Read more