हम कैसे मनाएं ‘हिंदी दिवस’

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** हर १४ सितम्बर को देश में ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता है। ज़रा हम पता तो करें कि सवा अरब के इस देश में कितने लोगों को मालूम है कि १४ सितम्बर को हिंदी दिवस होता है। आम आदमी का उससे कोई लेना-देना नहीं होता। सरकारी दफ्तरों में भी वह वार्षिक … Read more

हिन्दी हमारी भाषा है,इस पर अभिमान करें

राजकुमार जैन ‘राजन’ आकोला (राजस्थान) ****************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. भाषा किसी भी राष्ट्र की सामाजिक एवं सांस्कृतिक धरोहर की संवाहिका होती है और भाषायी एकता से ही राष्ट्र की अखण्डता सुदृढ़ होती है। कोई भी देश अपनी स्वयं की भाषा के बिना अपने राष्ट्रीय व्यक्तित्व को मौलिक रूप से परिभाषित नहीं कर सकता। भारत की … Read more

भारत की आत्मा है हिन्दी

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. मानव शरीर की रचना अनेक तंत्र-तंत्रिकाओं, मांस-पेशियों तथा पांच आंतरिक ज्ञानेन्द्रियों एवं पांच बाहरी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा हुई है,लेकिन इसकी सुन्दरता तब तक है,जब तक इसमें आत्मा का संचालन हैl प्राणविहीन प्राणी का जीवन निष्क्रिय है,क्योंकि उसका अस्तित्व मिट चुका है। अस्तित्व का जीवंत संबंध प्राण से है। … Read more

`चंद्रयान-२` की आंशिक सफलता और हमारी अवैज्ञानिक मानसिकता…!

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** भारत का मिशन चंद्रयान-२ कितना सफल रहा और कितना असफल,यह अभी ठीक से तय होना है,लेकिन इस पर हम किसी वैज्ञानिक और ठोस निष्कर्ष पर पहुंचें,उसके पहले ही देश में जिस तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं,उससे यही साबित हो रहा है कि, इसरो की उपलब्धि जो भी हो,हम … Read more

हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने की बुनियाद कमज़ोर है क्या ?

डॉ.अरविन्द जैन भोपाल(मध्यप्रदेश) ***************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. सौ बरस से अधिक समय हो गया हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकार मिले,पर आज भी हिंदी सिर्फ हिंदी मानने वालों के कारण बची हैl महात्मा गाँधी ने १९१८ में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा था कि-“हिंदी को राष्ट्रभाषा का अधिकारी घोषित करना और दक्षिण भारत में हिंदी … Read more

विडम्बना:गहन संघर्ष करना पड़ रहा भारतीय भाषाओं के लिए

प्रो.जोगा सिंह विर्क पटियाला(पंजाब) *************************************************************** भारतीय भाषाओं की साझा चुनौतियाँ व समाधान परिसंवाद…….. यह अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि स्वतंत्रता के ७२ वर्ष बाद भी भारतीय भाषा-भाषियों को भारतीय भाषाओं के लिए गहन संघर्ष करना पड़ रहा हैl इस किसी भी भाषा का जीवन इस बात पर निर्भर है कि उसका सभी मातृ-भाषा कार्य-क्षेत्रों … Read more

आत्मा का स्वाभाविक धर्म है क्षमा

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** जैन धर्म में पर्यूषण पर्व के उपरांत ‘क्षमावाणी’ पर्व मनाया जाता है,जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अन्य से जाने-अनजाने में किए गए किसी ऐसे काम के लिए क्षमा मांगता है,जिससे उन्हें दुख पहुंचा हो,चाहे वह मन से हो,वचन से अथवा कार्य से। साथ ही,वह अन्य को भी क्षमा करता है। क्षमावाणी ऐसा पर्व … Read more

एक नाव में सवार हमारी भाषाएँ

निर्मलकुमार पाटोदी इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** इस विचार से सहमत नहीं हूँ-“हिंदी का दुर्भाग्य है,हिंदी के लोग भारत की अन्य प्रांतीय भाषाएँ सीखते नहीं,इसलिए हिंदी का विकास नहीं हुआ है।” हिंदी भाषा है,उसका दुर्भाग्य कहना ठीक नहीं है। भाषा का दुर्भाग्य कहना अनुचित है। दुनियाभर में लोग स्वेच्छा से अपनी-अपनी भाषाएँ सीखते हैं। हिंदी को स्वाधीनता के … Read more

तालिबान के साथ अटपटा समझौता

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** अमेरिका की तरफ से जलमई खलीलजाद अफगानिस्तान के तालिबान नेताओं से पिछले डेढ़-दो साल से जो बात कर रहे थे,वह अब खटाई में पड़ती दिखाई पड़ रही है,क्योंकि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने उस पर दस्तखत करने से मना कर दिया है। अभी-अभी ताजा सूचना मिली है कि,अगर राष्ट्रपति … Read more

साथी हिंदी-कर्मियों से मन की बात

डॉ.एम.एल.गुप्ता ‘आदित्य’  मुम्बई (महाराष्ट्र) ********************************************************** ‘हिंदी दिवस’ विशेष…….. राजभाषा विभाग सहित भारत संघ के कार्यालयों के हिंदी अनुभागों-विभागों- एककों आदि में और संघ की राजभाषा नीति के लिए कार्यरत सभी कार्मिकों,वे चाहे किसी भी कार्यालय में और किसी भी पद पर क्यों न हों,उनके कार्य का मुख्य उद्देश्य यह है कि संघ के कार्यों में … Read more